छत्तीसगढ़, 14 अप्रैल राज्य में नकली दवाओं के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जहां एंटीबायोटिक के नाम पर फर्जी उत्पाद सप्लाई कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा था। चार महीने की जांच के बाद पुलिस और ड्रग विभाग ने इंदौर, भाटापारा और सारंगढ़ से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
ट्रांसपोर्ट में मिली खेप से शुरू हुई जांच
मामला तब सामने आया जब Gogaon Transport Area में संदिग्ध दवाओं की खेप पकड़ी गई। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने मौके पर पहुंचकर दवाएं जब्त कीं और जांच शुरू की।
एंटीबायोटिक के नाम पर निकला पाउडर
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिस एंटीबायोटिक दवा की सप्लाई हो रही थी, वह असल में साधारण पाउडर था। पैकेजिंग पर चेन्नई की एक कंपनी का नाम लिखा था, लेकिन जांच में पाया गया कि ऐसी कोई कंपनी अस्तित्व में ही नहीं है।
इंदौर से जुड़ा पूरा सप्लाई नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह फर्जी दवा नेटवर्क इंदौर से संचालित हो रहा था। सप्लाई चैन में भाटापारा और सारंगढ़ के मेडिकल कारोबारियों की भूमिका भी पाई गई।
तीन आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजे गए
पुलिस ने रोचक अग्रवाल (इंदौर), सुरेंद्र कामनानी (भाटापारा) और खेमराम बानी (सारंगढ़) को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सभी पर Drugs and Cosmetics Act के तहत कार्रवाई की गई है।
जांच में कई गंभीर सवाल
यह राज्य में नकली दवाओं का तीसरा बड़ा मामला बताया जा रहा है। इससे पहले भी कई जिलों में नकली कफ सिरप और क्रीम के मामले सामने आ चुके हैं। अब एंटीबायोटिक जैसी गंभीर दवा में फर्जीवाड़े से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अधिकारी पर भी कार्रवाई
जांच के दौरान एक ड्रग निरीक्षक के संदिग्ध व्यवहार को लेकर उसे निलंबित भी किया गया है। फिलहाल पूरे नेटवर्क की आगे की जांच जारी है और अन्य लिंक की तलाश की जा रही है।


