रायपुर। छत्तीसगढ़ में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक अहम न्यायिक फैसला सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने Guru Ghasidas Central University प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि 15 दिनों के भीतर पात्र कर्मचारियों को नियमित पद के अनुसार वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने यह आदेश अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं हुआ था पूर्ण पालन
मामले में यह सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों और एसएलपी व रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न तो पूरी तरह नियमित किया था और न ही उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान वेतन दिया जा रहा था। इसी को लेकर कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
दस्तावेज सत्यापन और वेतन भुगतान पर हाईकोर्ट की सख्ती
सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया कि नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, केवल दस्तावेज सत्यापन बाकी है। वहीं कर्मचारियों की ओर से कहा गया कि आवश्यक पत्राचार उन्हें उपलब्ध ही नहीं कराया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि 27 अप्रैल 2026 का पत्राचार 12 मई तक सभी कर्मचारियों को उपलब्ध कराया जाए और उसके एक सप्ताह के भीतर दस्तावेज जमा कर प्रक्रिया पूरी की जाए।
15 दिन में वेतन भुगतान अनिवार्य
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जो कर्मचारी वर्तमान में नियमित पद पर कार्य कर रहे हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर नियमित वेतन का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने इसे कर्मचारियों के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
अगली सुनवाई 19 जून को
मामले की अगली सुनवाई 19 जून 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें यह समीक्षा की जाएगी कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेशों का पालन किस हद तक किया है।
यह फैसला राज्य के अन्य दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे समान वेतन और सेवा अधिकारों को लेकर नई दिशा मिलने की उम्मीद है।


