सुशासन तिहार में बड़ा विवाद: मंत्री के मंच से निलंबन निर्देश के बाद प्रशासन का यू-टर्न, पटवारी या सिस्टम—कौन जिम्मेदार?

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सुशासन तिहार में मंच से मंत्री द्वारा निलंबन के निर्देश, फिर कुछ देर बाद प्रशासन का यू-टर्न। आखिर गलती किसकी? पटवारी या फिर पूरे सिस्टम की।

भाटापारा। सुशासन तिहार में जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के दावों के बीच भाटापारा में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनसमस्या निवारण शिविर में पहुंची महिला देवकी साहू ने मंच से शिकायत की कि उनकी माता की भूमि का फौती नामांतरण 4 माह से लंबित है और लगातार चक्कर काटने के बावजूद कार्य नहीं हुआ। शिकायत सुनते ही मंत्री ने मंच से ही पटवारी को निलंबित करने के निर्देश एसडीएम को दे दिए।

प्रशासन ने जारी की विज्ञप्ति
लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। कुछ ही देर बाद जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा विज्ञप्ति जारी कर बताया गया कि, आवेदिका के दो ग्रामों में फौती नामांतरण पहले ही अप्रैल माह में किया जा चुका था, लेकिन जानकारी के अभाव में महिला ने दोबारा आवेदन प्रस्तुत कर दिया। वहीं एक ग्राम में सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण नामांतरण नहीं हो सका।

Minister tankram varma

तो.. भटक क्यों रही थी महिला
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि, यदि नामांतरण पहले ही हो चुका था तो 4 माह से महिला भटक क्यों रही थी? क्या संबंधित राजस्व अमले ने हितग्राही को इसकी जानकारी देना जरूरी नहीं समझा? और अगर मंच पर शिकायत के बाद मंत्री निलंबन का आदेश नहीं देते, तो क्या आवेदिका को आज भी जानकारी मिलती?

क्या जवाबदेही तय होगी
यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक समन्वय की पोल खोलता नजर आ रहा है। एक ओर मंच से सख्त कार्रवाई का संदेश, दूसरी ओर कुछ ही देर बाद सफाई—इससे आम जनता के बीच भ्रम और अविश्वास बढ़ना स्वाभाविक है। सुशासन तिहार जनता की समस्याओं के समाधान का माध्यम है या फिर मंचीय घोषणाओं और बाद की सफाइयों का आयोजन—भाटापारा की इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर जवाबदेही तय किसकी होगी, यह देखना बाकी है।

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