संगीत जगत को बड़ा झटका: आशा भोसले का निधन, 92 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

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मुंबई। भारतीय सिनेमा की दिग्गज गायिका आशा भोसले का निधन हो गया है। वह 92 वर्ष की थीं। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से संगीत और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

बीमारी के बाद बिगड़ी थी हालत
परिवार के अनुसार, उन्हें चेस्ट इंफेक्शन और अत्यधिक थकान की शिकायत थी। पिछले कुछ दिनों से उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी, जिसके बाद अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था।

1940 के दशक से शुरू हुआ सुनहरा सफर
आशा भोसले ने अपने करियर की शुरुआत 1940 के दशक में की थी। शुरुआती दौर में उन्होंने कम बजट फिल्मों में गाकर पहचान बनाई। 1952 की फिल्म संगदिल से उन्हें पहचान मिली, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वह लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं, लेकिन अपनी अलग आवाज और शैली के दम पर उन्होंने खुद की विशिष्ट पहचान बनाई।

‘नया दौर’ से मिली बड़ी सफलता
1957 में आई फिल्म नया दौर उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई। इसमें मोहम्मद रफी के साथ उनकी जोड़ी बेहद लोकप्रिय रही। “मांग के साथ तुम्हारा”, “साथी हाथ बढ़ाना” और “उड़ें जब-जब जुल्फें तेरी” जैसे गीत आज भी श्रोताओं की जुबां पर हैं।

हर दौर में खुद को साबित किया
1960 और 70 के दशक में उन्होंने हर तरह के गीतों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई। फिल्म तीसरी मंजिल में आर.डी. बर्मन के साथ उनके गाने “आजा आजा”, “ओ हसीना जुल्फों वाली” और “पिया तू अब तो आजा” बेहद चर्चित रहे।

1981 में फिल्म उमराव जान की गजलें “दिल चीज क्या है” और “इन आंखों की मस्ती” ने उन्हें नई ऊंचाई दी, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। बाद में फिल्म इजाजत के गीत “मेरा कुछ सामान” के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

नई पीढ़ी में भी कायम रहा जादू
1990 और 2000 के दशक में भी आशा भोसले ने अपनी आवाज का जादू बरकरार रखा। रंगीला और लगान जैसी फिल्मों के गीतों में उनकी आवाज गूंजी। उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली समेत करीब 20 भाषाओं में हजारों गीत गाए। उनके नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

अंतिम समय तक रहीं सक्रिय
उम्र के अंतिम पड़ाव तक भी वह मंच पर सक्रिय रहीं। वर्ष 2025 में दुबई में हुए एक कॉन्सर्ट में उन्होंने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था।

संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति
आशा भोसले का निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी मधुर आवाज और अनगिनत गीत हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।

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