रामपुरा में कोटेदार की खुली पोल: राशन घोटाले की जांच में कालाबाजारी उजागर, FIR के आदेश

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अजीत उपाध्याय पत्रकार

माधौगढ़ (जालौन)। नगर पंचायत रामपुरा में उचित दर विक्रेता रामप्रकाश के खिलाफ खाद्यान्न वितरण में अनियमितताओं की शिकायत आखिरकार जांच में सही पाई गई। मामले में प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया गया कि 18 अप्रैल 2026 को सम्पूर्ण समाधान दिवस में श्रीमती राजश्री व  सनिल कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी।

आरोप था कि कोटेदार द्वारा बिना मुनादी के चयनित लोगों को राशन दिया जाता है, अंगूठा लगवाकर बाद में आने को कहा जाता है और प्रति कार्डधारक करीब 2 किलो खाद्यान्न कम दिया जाता है। साथ ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें विक्रेता ई-कांटे पर बांट से तौल करता नजर आया। शिकायत के आधार पर नायब तहसीलदार व क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी द्वारा संयुक्त जांच की गई।

प्रारंभिक जांच में कुछ कार्डधारकों ने विक्रेता के पक्ष में बयान दिए, लेकिन 23 अप्रैल को दोबारा जांच में 32 कार्डधारकों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें कई लोगों ने राशन कम मिलने, देरी से वितरण और अभद्र व्यवहार की पुष्टि की। जांच के दौरान विक्रेता की दुकान में भारी मात्रा में खाद्यान्न की कमी भी पाई गई। करीब 22 बोरी गेहूं, 3 बोरी चावल और 4.5 बोरी ज्वार कम मिला, जिससे कालाबाजारी की आशंका को बल मिला।

अधिकारियों के अनुसार विक्रेता का कृत्य अनुबंध की शर्तों और उत्तर प्रदेश आवश्यक वस्तु वितरण नियंत्रण आदेश 2016 का उल्लंघन है। जिलाधिकारी द्वारा 24 अप्रैल 2026 को एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दे दी गई है। अब मामले में विधिक कार्रवाई के तहत आगे की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है और अन्य कोटेदारों के लिए भी यह एक सख्त संदेश माना जा रहा है।

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