मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना प्रभावित, दवा और जांच के लिए परेशान हो रहे जरूरतमंद परिवार
कोंडागांव। शहर की स्लम बस्तियों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवार इन दिनों मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) के दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। रोज की तरह कई लोग अपनी पुरानी जांच रिपोर्ट, दवाइयों की पर्चियां और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लेकर इंतजार करते हैं, लेकिन मोबाइल मेडिकल यूनिट नहीं पहुंचने से उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
गरीबों के लिए बनी थी चलती-फिरती स्वास्थ्य सेवा
मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट लंबे समय से शहरी क्षेत्रों की गरीब बस्तियों में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख माध्यम रही है। इस सुविधा के कारण लोगों को अस्पताल जाने की परेशानी से राहत मिलती थी और डॉक्टर, जांच एवं दवाइयां उनके मोहल्ले तक उपलब्ध हो जाती थीं।
मुफ्त जांच और दवाइयों से मिलती थी राहत
मोबाइल मेडिकल यूनिट में एमबीबीएस डॉक्टर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट की टीम मौजूद रहती थी। इसके माध्यम से मरीजों को निःशुल्क उपचार के साथ करीब 170 प्रकार की आवश्यक दवाइयां और 41 प्रकार की पैथोलॉजी जांच, ईसीजी सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थीं।
बुजुर्ग और गंभीर मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित
फिलहाल कोंडागांव जिले में मोबाइल मेडिकल यूनिट का संचालन प्रभावित होने से नियमित इलाज कराने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मधुमेह, ब्लड प्रेशर के मरीजों के साथ बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चों को स्वास्थ्य जांच के लिए अब अन्य साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
लोगों को फिर सेवा शुरू होने की उम्मीद
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मोबाइल मेडिकल यूनिट उनके लिए सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि घर के पास मिलने वाली भरोसेमंद स्वास्थ्य सुविधा थी। इसके माध्यम से गरीब परिवारों को समय पर इलाज और दवाइयां मिल जाती थीं।
अब जिले के हजारों हितग्राहियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कब फिर से मोबाइल मेडिकल यूनिट बस्तियों में पहुंचेगी और डॉक्टरों की टीम मरीजों का इलाज शुरू करेगी। लोगों को उम्मीद है कि यह सुविधा जल्द बहाल होगी और जरूरतमंद परिवारों को फिर से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।




