‘नो-एंट्री’ में खाकी का ‘वसूली सिंडिकेट’, बनोरा आश्रम और नालंदा परिसर के नाम पर खाली ट्रकों की भी एंट्री, 300-500 रुपये में बिक रहे नियम!

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रायगढ़@दैनिक खबर सार :- रायगढ़ शहर में रात के अंधेरे में ट्रैफिक पुलिस की अवैध वसूली का बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक मैसेज ने जूटमिल पुलिस और ट्रैफिक जवानों की पोल खोलकर रख दी है। आरोप है कि शहर के प्रतिष्ठित बनोरा आश्रम और नालंदा परिसर की आड़ लेकर पुलिसकर्मी नो-एंट्री के समय धड़ल्ले से भारी वाहनों को शहर में प्रवेश दे रहे हैं।

शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने और सड़क हादसों को रोकने के लिए लागू किए गए ‘नो-एंट्री’ के नियम अब पुलिसकर्मियों के लिए अवैध कमाई का एक बड़ा जरिया बन चुके हैं। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर तेजी से वायरल हो रही एक खबर ने रायगढ़ पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि रायगढ़ ट्रैफिक पुलिस और जूटमिल थाने के कुछ जवान रात के अंधेरे में शहर के प्रतिष्ठित बनोरा आश्रम और नालंदा परिसर का नाम लेकर लाखों रुपये की अवैध वसूली कर रहे हैं।

समय से पहले ही खुल जाते हैं नो-एंट्री के बैरिकेड्स..

शहर की सुरक्षा के लिहाज से भारी वाहनों का प्रवेश रात 10 बजे से लेकर तड़के 3 बजे तक पूरी तरह से वर्जित रहता है। लेकिन वायरल हो रही खबर के मुताबिक, जूटमिल पुलिस के आरक्षक तरुण माहिलाने और ट्रैफिक पुलिस के जवानों द्वारा रात 11:30 बजे से ही पैसों की खातिर भारी वाहनों को शहर में घुसने की खुली छूट दे दी जाती है। आरोप है कि प्रति गाड़ी महज 300 से 500 रुपये लेकर बेखौफ होकर ट्रकों को शहर की ओर रवाना किया जा रहा है।

आश्रम का नाम लेकर खाली ट्रकों को भी मिल रही एंट्री..

इस पूरे वसूली कांड में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब भी कोई राहगीर या मीडियाकर्मी इन जवानों से नो-एंट्री के समय गाड़ियां छोड़ने का कारण पूछता है, तो उनका रटा-रटाया जवाब होता है कि इन गाड़ियों में ‘बनोरा आश्रम और नालंदा परिसर का सामान’ जा रहा है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि पुलिस खाली ट्रकों और डंपरों को भी इन्हीं संस्थाओं का नाम लेकर छोड़ रही है। आखिर खाली गाड़ी में किस आश्रम का कौन सा माल ढोया जा रहा है?

आस्था के केंद्रों की छवि धूमिल करने का प्रयास..

बनोरा आश्रम और नालंदा परिसर जैसी संस्थाएं शहर में आस्था और सम्मान का प्रतीक हैं। शिक्षा और धर्म के इन केंद्रों का नाम ढाल बनाकर जिस तरह से यह वसूली सिंडिकेट चलाया जा रहा है, वह बेहद निंदनीय है। यह न केवल प्रशासनिक नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाना है, बल्कि इन पवित्र संस्थाओं की छवि को भी बदनाम करने की एक घिनौनी साजिश प्रतीत होती है।

एसपी से सख्त कार्रवाई की मांग..

व्हाट्सएप ग्रुप्स में आग की तरह फैल रही यह ब्रेकिंग न्यूज़ अब शहरवासियों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है। जनता में इस भ्रष्टाचार को लेकर भारी आक्रोश है। अब शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों की निगाहें जिले के पुलिस अधीक्षक पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि इस वायरल दावे पर संज्ञान लेते हुए आला अधिकारी आरोपी आरक्षक तरुण माहिलाने और लिप्त ट्रैफिक जवानों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर वर्दी की आड़ में चल रहा यह लाखों की वसूली का खेल यूं ही बेखौफ जारी रहेगा।

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