धार्मिक । कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के साथ कुंवारी कन्याओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना से यह व्रत करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं।
पूजा थाली में शामिल करें ये 5 चीजें
कजरी तीज की पूजा के दौरान मां पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पित करने की परंपरा है। यदि सभी 16 श्रृंगार सामग्री उपलब्ध न हो, तो सुहाग से जुड़ी कुछ प्रमुख वस्तुएं भी श्रद्धापूर्वक अर्पित की जा सकती हैं।
1. सिंदूर
सिंदूर को सुहाग और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पूजा की थाली में सिंदूर रखकर मां पार्वती को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
2. लाल या हरी चूड़ियां
कजरी तीज की पूजा में लाल या हरी चूड़ियां शामिल की जा सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं में लाल रंग को सौभाग्य और हरे रंग को हरियाली एवं समृद्धि से जोड़ा जाता है।
3. मेहंदी
मेहंदी को भी सुहाग सामग्री का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। कजरी तीज पर मां पार्वती को मेहंदी अर्पित करने की परंपरा है। पूजा के बाद महिलाएं इसे अपने हाथों पर भी लगा सकती हैं।
4. बिंदी
सोलह श्रृंगार में बिंदी का विशेष स्थान माना गया है। पूजा की थाली में लाल बिंदी रखकर मां पार्वती को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
5. लाल चुनरी
मां पार्वती को लाल चुनरी अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक चुनरी चढ़ाने से देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है।
कब है कजरी तीज 2026?
पंचांग के अनुसार, कजरी तीज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। 2026 में कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा।




