छत्तीसगढ़ में जन संस्कृति मंच का पहला राज्य सम्मेलन सम्पन्न, संस्कृति व विचारधारा पर गहन मंथन

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रायपुर के वृंदावन हॉल में दो दिवसीय सम्मेलन, साहित्य और संस्कृति का संगम

रायपुर के वृंदावन हॉल में जन संस्कृति मंच (JSM) का छत्तीसगढ़ का पहला राज्य सम्मेलन भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में प्रदेशभर से साहित्यकार, बुद्धिजीवी, कलाकार और सांस्कृतिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। सम्मेलन में विचार, साहित्य और सामाजिक सरोकारों पर विस्तृत चर्चा हुई।


मुख्य वक्ता रामजी राय ने कहा—संशय और विवेक ही सच्ची बुद्धिजीविता की पहचान

सम्मेलन में मुख्य अतिथि प्रखर वक्ता एवं मार्क्सवादी चिंतक रामजी राय ने कहा कि बुद्धिजीवी वही है जो हर चीज को प्रश्न करे और विवेक के साथ सच्चाई को पहचाने। उन्होंने कहा कि सत्ता द्वारा परिभाषित सत्य को बिना प्रश्न स्वीकार करना सही दृष्टिकोण नहीं है। उन्होंने आलोचनात्मक सोच को आवश्यक बताया।


सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर वक्ताओं ने जताई चिंता

आलोचक सियाराम शर्मा ने अपने उद्बोधन में वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थाओं पर प्रभाव पड़ रहा है। वहीं अन्य वक्ताओं ने समाज में बढ़ती नफरत, वैचारिक टकराव और सांस्कृतिक बदलावों पर विचार व्यक्त किए।


सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा मंच, नाटक और गीतों ने खींचा ध्यान

सम्मेलन के दौरान कविताओं, जनगीतों, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आकर्षित किया। करमा लोकनृत्य, जनगीत और नाटक “आओ अब लौट चलें” ने सामाजिक मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा।


संगठनात्मक सत्र में छत्तीसगढ़ राज्य इकाई का गठन

संगठनात्मक सत्र में विचार-विमर्श के बाद जन संस्कृति मंच की छत्तीसगढ़ राज्य इकाई का गठन किया गया। रूपेन्द्र तिवारी को अध्यक्ष और राजकुमार सोनी को सचिव चुना गया। इस दौरान संगठन की भविष्य की दिशा और विस्तार पर भी चर्चा की गई।


सम्मेलन में साहित्यकारों और कलाकारों की रही सक्रिय भागीदारी

इस आयोजन में अनेक कवियों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। विभिन्न सत्रों में कविता पाठ, गीत, नाट्य प्रस्तुति और विचार-विमर्श ने पूरे सम्मेलन को जीवंत और वैचारिक रूप से समृद्ध बनाया।

 

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