जग्गी हत्याकांड: अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; सुप्रीम कोर्ट में 20 अप्रैल को सुनवाई

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2003 के जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।


तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश, 23 अप्रैल तक मोहलत

हाईकोर्ट ने अपने 78 पन्नों के फैसले में अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। तय समयसीमा के अनुसार उन्हें 23 अप्रैल तक ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करना होगा। यदि इस बीच उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलती, तो उन्हें जेल जाना होगा।


सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 20 अप्रैल को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अगली तारीख 20 अप्रैल तय की है और विधिवत याचिका दाखिल करने की अनुमति दी है।


2003 में हुई थी रामावतार जग्गी की हत्या

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता और प्रदेश के प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में शामिल थे।


CBI जांच में सामने आई साजिश

शुरुआत में मामले की जांच राज्य पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में इसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया। जांच में हत्या के पीछे साजिश और शूटरों के इस्तेमाल की बात सामने आई थी।


पहले बरी, अब दोषी—बदली केस की दिशा

साल 2007 में ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, लेकिन साक्ष्य के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। बाद में इस फैसले को चुनौती दी गई, और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई।


राजनीति में बढ़ी हलचल, सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर

इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजर 20 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2003 के जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई। 23 अप्रैल तक सरेंडर का आदेश, सुप्रीम कोर्ट में 20 अप्रैल को अगली सुनवाई।

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