दुनिया भर के वैज्ञानिक और युवा शोधकर्ता एक मंच पर, छह दिवसीय इंटरनेशनल स्कूल में अत्याधुनिक विश्लेषण तकनीकों पर मंथन
राउरकेला। क्रिस्टलोग्राफी और रीटवेल्ड रिफाइनमेंट एनालिसिस पर केंद्रित छह दिवसीय इंटरनेशनल स्कूल एवं वर्कशॉप का शुभारंभ National Institute of Technology Rourkela में हुआ। 23 से 28 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस कार्यक्रम में भारत और यूरोप के ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिकों के साथ देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों से लगभग 80 प्रतिभागी शामिल हुए हैं।

मटेरियल साइंस की गहराइयों को समझने का वैश्विक मंच
क्रिस्टलोग्राफी वह वैज्ञानिक विधा है, जो यह समझने में मदद करती है कि किसी पदार्थ के भीतर परमाणु या अणु किस प्रकार व्यवस्थित होते हैं। वहीं, रीटवेल्ड रिफाइनमेंट एक उन्नत विश्लेषण तकनीक है, जिसके माध्यम से एक्स-रे डिफ्रैक्शन पैटर्न को डिकोड कर पदार्थ की आंतरिक संरचना का सटीक निर्धारण किया जाता है।
इन तकनीकों का उपयोग बेहतर दवाओं के विकास, उन्नत ऊर्जा सामग्री, उच्च क्षमता वाली बैटरियों, न्यूक्लियर मटेरियल और अगली पीढ़ी की डिवाइस टेक्नोलॉजी के निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है।

संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर डीन (एकेडमिक) प्रो. अशोक कुमार तुरुक, डीन (SRICCE) प्रो. एस. के. प्रतिहार, भौतिकी एवं खगोल विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. जे. पी. कर, रजिस्ट्रार प्रो. रोहन धीमान, प्रो. पीताम्बर महानंदिया तथा कार्यक्रम संयोजक प्रो. दिलीप के. प्रधान उपस्थित रहे।

फ्रांस, जर्मनी और स्पेन के विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी
इस अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप में फ्रांस के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक—
- प्रो. मासिमो नेस्पोलो (यूनिवर्सिटी डी लोरेन, नैन्सी),
- प्रो. जुआन रोड्रिगेज-कार्वाजल (इंस्टीट्यूट लॉ-लैंगेविन, ग्रेनोबल),
- डॉ. क्लेयर वी. कॉलिन (इंस्टीट्यूट नील-CNRS एवं UGA, ग्रेनोबल)
स्वयं उपस्थित होकर व्याख्यान और ट्यूटोरियल सत्र ले रहे हैं।
जर्मनी और स्पेन के अन्य ख्यातिप्राप्त विदेशी विशेषज्ञ ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही भारत के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक भी प्रतिभागियों को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण दे रहे हैं।

शोधार्थियों और विशेषज्ञों के लिए कौशल उन्नयन का अवसर
इस वर्कशॉप में पीएचडी शोधार्थी, पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ता, आरएंडडी प्रोफेशनल्स तथा देशभर के संस्थानों के युवा एवं वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य भाग ले रहे हैं। उद्देश्य है—क्रिस्टलोग्राफिक विश्लेषण और एडवांस्ड डिफ्रैक्शन तकनीकों में विशेषज्ञता को सुदृढ़ करना।
“भारत में उच्च गुणवत्ता वाली क्रिस्टलोग्राफिक विश्लेषण क्षमता को मिलेगा बढ़ावा”
कार्यक्रम संयोजक प्रो. दिलीप के. प्रधान ने कहा,
“इस वर्कशॉप का उद्देश्य आधुनिक क्रिस्टलोग्राफिक तकनीकों में विशेषज्ञता विकसित करना है। वैश्विक विशेषज्ञों और शुरुआती करियर के शोधकर्ताओं को एक साझा शैक्षणिक मंच पर लाकर यह पहल नवाचार को प्रोत्साहित करती है और भारत में उच्च गुणवत्ता वाली क्रिस्टलोग्राफिक विश्लेषण को बढ़ावा देती है। यह पहल ऊर्जा भंडारण, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, फेरोइक्स और मल्टीफेरोइक्स जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को सशक्त बनाते हुए भारत की उन्नत सामग्री अनुसंधान क्षमता को मजबूत करेगी।”
सैद्धांतिक आधार से लेकर प्रायोगिक प्रशिक्षण तक
वर्कशॉप के पहले साढ़े तीन दिन कोर क्रिस्टलोग्राफिक अवधारणाओं पर केंद्रित रहेंगे, जबकि शेष ढाई दिन रीटवेल्ड रिफाइनमेंट एनालिसिस के सैद्धांतिक ढांचे और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग पर गहन प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
यह कार्यक्रम Anusandhan National Research Foundation, Board of Research in Nuclear Sciences तथा International Union of Crystallography के सहयोग से आयोजित किया गया है। आगामी दिनों में व्याख्यान, ट्यूटोरियल और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के हैंड्स-ऑन सत्र जारी रहेंगे।
