सांस्कृतिक धरोहर बचाने की पहल: “ज्ञानभारतम” पाण्डुलिपि सर्वे अभियान शुरू, जिले में होगा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार

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प्राचीन पाण्डुलिपियों की खोज और संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहल

बलरामपुर जिले में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की ओर से “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान” शुरू किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य देश और राज्य में उपलब्ध प्राचीन व ऐतिहासिक पाण्डुलिपियों का सर्वे, सूचीकरण और संरक्षण सुनिश्चित करना है। इसके तहत विभिन्न संस्थानों और निजी संग्रहों में सुरक्षित पाण्डुलिपियों का व्यवस्थित सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण किया जाएगा।


जलवायु और उपेक्षा से खतरे में विरासत, अब वैज्ञानिक संरक्षण पर जोर

पाण्डुलिपियां हमारी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनमें प्राचीन चिकित्सा, साहित्य, धर्म, विज्ञान और सामाजिक परंपराओं से जुड़ी अमूल्य जानकारी सुरक्षित होती है। लेकिन जलवायु प्रभाव, कीट और उचित देखभाल के अभाव में ये धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं। ऐसे में इनका वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना समय की जरूरत बन गया है।


“ज्ञानभारतम पोर्टल” से जुड़कर आमजन भी बन सकते हैं अभियान का हिस्सा

इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने के लिए “ज्ञानभारतम पोर्टल” और मोबाइल एप लॉन्च किया गया है। कोई भी व्यक्ति या संस्था अपने पास उपलब्ध पाण्डुलिपियों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर इस सर्वेक्षण में शामिल हो सकता है। यह पहल उन पाण्डुलिपियों को खोजने और सूचीबद्ध करने का प्रयास है, जो अभी तक परिवारों, मंदिरों, मठों या निजी संग्रहों में तो हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं हैं।


जिले में सर्वे के लिए टीम गठित, ग्राम स्तर तक पहुंचा अभियान

कलेक्टर राजेन्द्र कटारा के मार्गदर्शन में जिले में इस अभियान का क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिला और स्थानीय स्तर पर सर्वेक्षण टीम गठित की गई है। ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत सचिवों को सर्वेक्षक नियुक्त किया गया है, जो नोडल अधिकारी के समन्वय में काम कर रहे हैं। इस अभियान के लिए सहायक संचालक शिक्षा रामपथ यादव को नोडल अधिकारी बनाया गया है।


“पाण्डुलिपियों का स्वामित्व सुरक्षित रहेगा”, प्रशासन ने की भागीदारी की अपील

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सर्वे और डिजिटलीकरण के बाद भी पाण्डुलिपियों का स्वामित्व संबंधित व्यक्ति, परिवार या संस्था के पास ही रहेगा। जिलेवासियों से अपील की गई है कि यदि उनके पास या आसपास ऐसी पाण्डुलिपियां हैं, तो वे इसकी जानकारी प्रशासन को दें और इस अभियान से जुड़ें।


विरासत बचाने का ऐतिहासिक अवसर, जनभागीदारी से ही होगा सफल

“ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान” सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन का मानना है कि समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है और जिले की विशिष्ट पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो सकेगी।

 

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