अग्रोहा भवन में शुरू हुई कथा, पं. ओमप्रकाश शर्मा ने दिया भक्ति, सदाचार और जनसेवा का संदेश
गौरी शंकर मंदिर से अग्रोहा भवन तक निकली कलश यात्रा
रायगढ़। बेरीवाल परिवार द्वारा पितृमोक्षार्थ एवं श्री गयाजी श्राद्ध निमित्त आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ रविवार को धार्मिक और भक्तिमय माहौल में हुआ। आयोजन के तहत सुबह 8:30 बजे गौरी शंकर मंदिर से अग्रोहा भवन तक श्रीभागवत भगवान के आगमन के साथ कलश यात्रा निकाली गई।
कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ हिस्सा लिया। अग्रोहा भवन पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और इसके साथ ही श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ।
प्रथम दिवस भगवान के 24 अवतारों का किया वर्णन
दोपहर 3 बजे से कथा वाचक पंडित श्री ओमप्रकाश शर्मा ने श्रीमद्भागवत कथा का वाचन किया। परिवारजनों और श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
कथा के प्रथम दिवस श्रीगणेश पूजन, श्रीमद्भागवत माहात्म्य और मंगलाचरण के साथ सूत-शौनकादि ऋषियों के संवाद का वर्णन किया गया। इसके अलावा भगवान के 24 अवतारों की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
राधा भक्ति से जीवन को सार्थक बनाने का संदेश
कथा के दौरान पंडित ओमप्रकाश शर्मा ने श्रद्धालुओं को भक्ति और सदाचार का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में भगवान की भक्ति को विशेष स्थान देना चाहिए। राधा भक्ति में मन को लगाकर जीवन को पवित्र और सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ईमानदारी और परिश्रम से धन अर्जित करना गलत नहीं है, लेकिन धन का सदुपयोग भी जरूरी है। अपनी कमाई का एक हिस्सा जरूरतमंदों की सहायता, जनसेवा और धार्मिक कार्यों में लगाकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई जा सकती है।
भक्ति के साथ सेवा भाव को बताया जरूरी
पंडित शर्मा ने कहा कि भक्ति, सदाचार और सेवा का समन्वय ही जीवन को सही दिशा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से पापरहित और संयमित जीवन जीने के साथ जरूरतमंदों की मदद करने तथा समाजहित के कार्यों में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
बेरीवाल परिवार ने श्रद्धालुओं से की कथा में शामिल होने की अपील
इस अवसर पर बेरीवाल परिवार के शंभूदयाल बेरीवाल, प्रमोद कुमार, विनोद कुमार, संजय पल्लू बेरीवाल, अजय, विजय, दिग्विजय, अनीश, विकास, आकाश सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
परिवारजनों ने श्रद्धालुओं से श्रीमद्भागवत कथा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर कथा श्रवण करने और पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की। कथा के दौरान अग्रोहा भवन का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
दूसरे दिन इन प्रसंगों का होगा वर्णन
कथा के दूसरे दिन 14 सितंबर को दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक पंडित श्री ओमप्रकाश शर्मा के श्रीमुख से विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इसमें भीष्म-पाण्डव आदि का चरित्र, परीक्षित जन्म, श्रीशुकदेव प्राकट्य, परीक्षित-श्रीशुकदेव संवाद, सती चरित्र, ध्रुव चरित्र और जड़भरत उपाख्यान का विस्तारपूर्वक वर्णन होगा।




