नदी बचेगी तो जीवन बचेगा: रायपुर में आज ‘स्रोत महोत्सव’, अरपा संरक्षण के लिए पंडित रामनिवास तिवारी होंगे सम्मानित

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रायपुर। नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार की पहल के तहत 19 अगस्त 2026 को रायपुर में ‘स्रोत महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम सुबह 9:30 बजे ओमेगा गार्डन, जुबली हॉल में आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्य सचिव विकास शील की मौजूदगी में अरपा नदी के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति, पेंड्रा के संरक्षक पंडित रामनिवास तिवारी को सम्मानित किया जाएगा।

‘हमारी नदियां, हमारी जिम्मेदारी’ पर होगा मंथन

कार्यक्रम में नदी पुनर्जीवन, जनभागीदारी, क्षमता निर्माण और नदियों के सतत संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा होगी। आयोजन का उद्देश्य नदियों के संरक्षण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ आम लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।

10 साल से अरपा उद्गम बचाने की मुहिम

बताया गया कि अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा वर्ष 2016 से अरपा नदी के उद्गम स्थल के संरक्षण को लेकर अभियान चला रही है। समिति ने बिलासा कला मंच बिलासपुर के ‘अरपा बचाओ अभियान’ के सहयोग से जनजागरण से लेकर न्यायालय तक अपनी लड़ाई जारी रखी।

समिति के संरक्षक पंडित रामनिवास तिवारी ने अरपा के उद्गम स्थल को बचाने के लिए लगातार जनजागरण अभियान चलाया और हाईकोर्ट में भी इस मुद्दे को उठाया। उनके प्रयासों के बाद पेंड्रा के कराड क्षेत्र स्थित अरपा के उद्गम स्थल की भूमि के संरक्षण की दिशा में कार्रवाई हुई।

अधिवक्ताओं की भूमिका भी रही महत्वपूर्ण

अरपा उद्गम संरक्षण की इस मुहिम में बिलासपुर के अधिवक्ताओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समिति की ओर से अधिवक्ता अरविंद पांडे के योगदान को विशेष रूप से सराहनीय बताया गया है।

सम्मान को लेकर समिति में खुशी

अरपा बचाओ अभियान दल के संयोजक डॉ. सोमनाथ यादव, अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा के संयोजक अक्षय नामदेव और नगर पालिका पेंड्रा के अध्यक्ष राकेश जालान ने समिति के संरक्षक पंडित रामनिवास तिवारी के सम्मानित होने पर खुशी जताई है।

समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल पंडित रामनिवास तिवारी का नहीं, बल्कि अरपा नदी के संरक्षण के लिए वर्षों से चलाए जा रहे जनअभियान और उससे जुड़े लोगों के संघर्ष का सम्मान है।

‘नदी बचेगी तो जीवन बचेगा’ के संदेश के साथ आयोजित यह महोत्सव छत्तीसगढ़ में नदी संरक्षण को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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