अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, स्कूल-हॉस्टल, पीजी और कोचिंग सेंटरों में तत्काल सेफ्टी ऑडिट पर जोर
रायपुर। विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक अधिकारियों को सक्रिय और सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का काम केवल किसी हादसे के बाद कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि संभावित खतरे की समय रहते पहचान कर उसे दूर करना भी प्रशासन की अहम जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
स्कूलों और हॉस्टलों का होगा सेफ्टी ऑडिट
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का सेफ्टी ऑडिट कर कमियों को चिन्हित करने और उन्हें निर्धारित समय-सीमा में दूर कराने को कहा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान यदि किसी संस्थान या भवन में सुरक्षा संबंधी कमी मिलती है तो केवल रिपोर्ट तैयार करने तक कार्रवाई सीमित न रहे। संबंधित कमियों को दूर कराने के लिए समय-सीमा तय कर उसका पालन भी सुनिश्चित किया जाए।
जर्जर भवनों पर विशेष नजर
मुख्यमंत्री ने स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद पुराने एवं जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन कराने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन भवनों से किसी प्रकार की जनहानि की आशंका है, उन्हें चिन्हित कर नियमानुसार तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
कलेक्टर-एसपी खुद करें निगरानी
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने जिलों में सुरक्षा संबंधी निरीक्षण और सुधार कार्यों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देश केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका असर जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।
हादसे का इंतजार करने की कार्यशैली बदले
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसी शिकायत या दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई करने की प्रवृत्ति से बाहर निकलने की जरूरत है। प्रशासन को लगातार संभावित जोखिमों की पहचान करनी होगी और समय रहते जरूरी सुधार करने होंगे।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बच्चों और विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ कराया जाना चाहिए। ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए जिसमें संभावित खतरे पहले ही सामने आ जाएं और दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सके।
लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा संबंधी निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निरीक्षण और सुधार की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो तथा जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
