कवित्री डॉ.श्रीमती उत्पला दास सारंगी मूलतः संबलपुर की बेटी और कला नगरी रायगढ़ की बहू हैं__
संबलपुर/ रायगढ़_ एक पुरानी कहावत है कला अपनी सुंदरता और उदारता के साथ हमेशा से पृथक_पृथक संस्कृतियों को आपस में जोड़ती रही हैं।
इस बात को प्रमाणित करते हुई एक बहुमुखी प्रतिभा की धनी के सुविख्यात कवित्री डॉ.श्रीमती उत्पला दास सारंगी ने उड़ीसा छत्तीसगढ़ और झारखंड की संस्कृतियों को अपने अंदर एक सार करते हुए,लगातार अपने जीवन काल में “काव्य और साहित्य” की साधना के साथ मानवीय चेतना को ऊंचाइयों तक ले जाने का काम किया है।
आप सम्बलपुर शहर के प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के बाद यही से शिक्षा दीक्षा पूर्ण करने के बाद रायगढ़ शहर के सम्मानित षडंगी परिवार में विवाही गई। विवाह के कुछ वर्ष उपरांत आप अपने पति स्वर्गीय रवि नारायण षड़ंगी के साथ अपनी कर्मभूमि जमशेदपुर में आ बसी। यही से आपने अपनी शासकीय सेवा के साथ काव्य साहित्य की साधना जारी रखी।
इस क्रम में आज दिनांक 14 जून 2026 के दिन संबलपुर शहर के होटल हरजीत रेसीडेंसी के हाल में शहर के प्रबुद्ध नागरिकों,साहित्यकारों और कवियों की उपस्थिति में आयोजित एक गरिमामयी आयोजन के बीच आपकी प्रथम काव्य श्रृंखला झरोखे के उस पार का उड़िया भाषा संस्करण का विमोचन सम्पन्न हुआ।
इस काव्य श्रृंखला में आपने अपनी लिखी 71 काव्य रचनाओं में समाज की छोटी-छोटी घटनाओं का सुंदर वर्णन तो किया ही है, साथ ही अपने अनुभवों को शामिल करते हुए स्त्री के कोमल हृदय की भावनाओं को भी व्यक्त किया है।

आपके बताये अनुसार भविष्य में इस काव्य संग्रह का हिन्दी और अंग्रेजी अनुवाद होने और बाद उनके प्रकाशन प्रबल संभावना है।
वही काव्य श्रृंखला झरोखे के उस पार विमोचन को लेकर कार्यक्रम में उपस्थित सौ से अधिक प्रबुद्ध नागरिकों और साहित्यकारो ने उन्हें बधाइयां देते हुए शुभकामनाएं प्रेषित की। वही कुछ श्रेष्ठ स्थानीय कवियों ने मातृभाषा उड़िया में कविताओं का पाठन किया।
परिचय_
पेशे से शिक्षक रही कवित्री डॉ.उत्पला दास आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। आप अपनी उत्कृष्ट लेखन क्षमता के बल पर न केवल अनेकों प्रेरक कहानियां और कविताओ की रचना कर चुकी है। साथ ही आप अनेकों साहित्य सम्मानों से नवाजी भी गई हैं।

जिनमें बरहमपुर से प्रकाशित होने वाले पहले समाचार पत्र “दैनिक आशा” समाचार पत्र के द्वारा सर्वश्रेष्ठ स्तंभकार के रूप में सम्मानित किया जाना। वही संबलपुर से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र “हीराखंड” द्वारा उन्हें सर्वश्रेष्ठ कवयित्री के रूप में सम्मानित किया जाना प्रमुख है।
इसके अलावा प्रजातंत्र समाचार पत्र के द्वारा आपको कवि के रूप में सम्मानित किया गया है। वहीं सुंदरगढ़ लेखक संघ द्वारा उन्हें अंचल की उत्कृष्ट आशावादी कवित्रि के रूप में सम्मानित किया है। आपको सर्वश्रेष्ठ “पश्चिमी ओडिशा पुरस्कार” सिंहभूम में साहित्य हित में विद्वान दुर्गा चरण कर बंसद के द्वारा ओडिशा की श्रेष्ठ कवयित्री का सम्मान भी दिया है।
अभी हाल ही में संपन्न टैगोर सोसाइटी जमशेदपुर के द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय टैगोर कविता दिवस के छठे संस्करण में आपको सम्मानित किया गया है। आपको ओडिशा के विभिन्न संस्थानों से उनकी कहानियों और कविताओं के लिए सम्मान प्राप्त हुए हैं। वर्तमान में आप झारखंड राज्य के जमशेदपुर शहर में रहती हैं।
आप वहां के सभी ओडिया संस्थानों,रोटरी क्लब और इनर व्हील क्लब से जुड़ी हुई हैं। इसी संदर्भ में, वे प्रवासी उत्कलाई साहित्यकारों के साथ मिलकर अपनी मातृभाषा को विकसित करने के लिए साहित्यिक कार्यक्रमों में भाग लेती रही हैं।आप ओडिशा के कुछ संकाय सदस्य ओडिया भाषा में पीएचडी शोध सहायक के रूप में कार्यरत हैं।
साथ ही झारखंड सरकार के निर्देशन में झारखंड के ओडिया स्कूलों में मातृभाषा साहित्य की पाठ्यपुस्तकों के निर्माण में उनके योगदान के लिए झारखंड सरकार द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया है।
वर्ष 2024 में आपको ओडिया विश्वविद्यालय, सत्यभाटी के द्वारा वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री के रूप में सम्मानित किया जा चुका है।
वही तकनीकी शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में योगदान के लिए रोटरी क्लब, इनर व्हील क्लब और टाटा स्टील के सीएसआर विभाग द्वारा सम्मानित किया गया है।
आपको जाजपुर जिला पुस्तक मेले में उड़ीसा शासन के जनसंपर्क एवं सूचना विभाग के द्वारा विजेता के रूप में सम्मानित किया गया है।
आप आशावादी काव्य साधना के अलावा प्रसार भारती का जमशेदपुर में नियमित ओडिया कार्यक्रमों में वक्ता के रूप में अपना काम जारी रखी हुई हैं। साथ ही ओडिशा के कुछ प्रोफेसर ओडिया भाषा में पीएचडी शोध में मार्गदर्शक के रूप में काम करती हैं।
भविष्य में आपकी योजनाएँ:_
साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग जारी रहेगा। प्रत्येक वर्ष, ओडिया छात्र जमशेदपुर में मैट्रिक परीक्षा देने के पात्र होंगे।
