AI, पायथन और वेब डिज़ाइन की आधुनिक तकनीकों से रूबरू हुए प्रतिभागी, 13 से 68 वर्ष आयु वर्ग ने लिया हिस्सा
बिलासपुर। एच. डी. शेफर मेमोरियल फाउंडेशन एवं कोडक्राफ्ट सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय “लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” का सफलतापूर्वक समापन हुआ। सीओसीएमआई कैम्पस ककुदंड, बिलासपुर में 11 मई से 27 मई 2026 तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों, प्रोफेशनल्स और सेवानिवृत्त लोगों सहित 13 से 68 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, पायथन प्रोग्रामिंग, वेबसाइट डिज़ाइनिंग, एक्सेल, उद्यमिता कौशल और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेष बात यह रही कि प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए किसी पूर्व तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं रखी गई थी, जिससे तकनीक सीखने के इच्छुक नए प्रतिभागियों को भी अवसर मिला।
प्रतिभागियों ने तैयार किए इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने व्यक्तिगत पोर्टफोलियो वेबसाइट्स, AI आधारित प्रोफेशनल हेडशॉट्स, पोस्टर डिज़ाइन, निमंत्रण पत्र, पायथन आधारित BMI कैलकुलेटर सहित कई मिनी प्रोजेक्ट्स तैयार किए।
विशेष रूप से 15 वर्षीय बेनहुर और 17 वर्षीय एंजेल लहरे ने AI की सहायता से दो पूर्ण कंप्यूटर गेम विकसित कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
“तकनीक तभी सार्थक है जब वह समाजहित में उपयोग हो” — संजय विल्सन
समापन समारोह की अध्यक्षता एच. डी. शेफर मेमोरियल फाउंडेशन के निदेशक संजय विल्सन ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तभी सार्थक है, जब उसे मानवीय विवेक, नैतिकता और कौशल के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने प्रतिभागियों को तकनीक का उपयोग आत्मविकास और समाजहित में करने की प्रेरणा दी।
समारोह में आकांक्षा नाथानियल, एंजेल लहरे, बेनहुर, डेफनी, मेर्लिन, राजेश मकबूल और विस्मय सहित सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर आलोक विल्सन, विनय जेम्स और के. एम. के. पॉल की उपस्थिति रही।
प्रशिक्षकों और आयोजकों की रही अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अप्रतिम सैमुएल और डेटा साइंटिस्ट कपिल वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकी अवधारणाओं और व्यावहारिक प्रयोगों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के सफल संचालन का श्रेय रेव. निखिल पॉल को दिया गया, जिनके समर्पण और कुशल प्रबंधन से पूरा आयोजन सुव्यवस्थित तरीके से सम्पन्न हुआ।
तकनीकी शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाने की पहल
“लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” ने यह साबित किया कि तकनीकी शिक्षा केवल इंजीनियरिंग या विज्ञान के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज का हर वर्ग आधुनिक तकनीक सीखकर आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ सकता है।


