मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बलौदाबाजार की धरती से दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के हितग्राहियों को 10-10 हजार रुपए की राशि ट्रांसफर की.
बलौदाबाजार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बुधवार को बलौदाबाजार जिले के दौरे पर रहे. यहां उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के तहत 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की.
CM साय ने दी बधाई
इस योजना के तहत पूरे छत्तीसगढ़ के 4 लाख 95 हजार 965 भूमिहीन कृषि मजदूरों को हर साल 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. CM ने कहा कि बलौदाबाजार की पवित्र धरती से हितग्राहियों को राशि ट्रांसफर हुई है सभी को बहुत बहुत बधाई.
कोई अपने छोटे दुकान को बढ़ा रहा है, कोई बेटा-बेटियों को पढ़ा रहा है. इस तरह 10 हजार रुपए की राशि से मजदूरों को लाभ मिल रहा है.- विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री
7 हजार से 10 हजार की गई राशि
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना को शुरू करने के पीछे हमारा उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के शुद्ध आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करना है. सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें. इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है.
कई स्टॉल का लिया जायजा
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, कलेक्टर कुलदीप शर्मा और एसपी भावना गुप्ता सहित जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया. मुख्यमंत्री ने सभास्थल पहुंचकर कई विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया.
अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को भी मिली सुविधाएं
इस दौरान मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों को कृषि उपकरण, ट्रायसाइकिल और मछली पालन से जुड़ी सामग्री का वितरण किया. साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों को घर की चाबियां भी सौंपीं. वन विभाग की ओर से स्कूली बच्चों को बायनोकुलर दिए गए और टीबी मुक्त पंचायत बनाने वाले सरपंचों को सम्मानित किया गया.
क्या है भूमिहीन कृषि मजदूर योजना?
सरकार के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की आय बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. पहले इस योजना में 7 हजार रुपये मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब 10 हजार रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है. इस योजना में भूमिहीन कृषि मजदूरों के साथ वनोपज संग्राहक भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी आदि पौनी-पसारी व्यवस्था से संबद्ध भूमिहीन परिवार भी शामिल हैं.
