आजादी के 75 साल बाद भी विकास से कोसों दूर सुखरीडबरी: सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाती

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50-60 वर्षों से आबाद गांव को आज तक नहीं मिला राजस्व ग्राम का दर्जा, ग्रामीणों ने लगाए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप

छुरा—प्रदेश के गरियाबंद जिले के वनांचल क्षेत्र में बसे विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाति के गांव सुखरीडबरी की तस्वीर आज भी विकास के सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती है। आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद गांव के लोग सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। करीब 30 परिवारों की आबादी वाले इस गांव को आज तक राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिल पाया है, जिसके कारण ग्रामीण कई शासकीय योजनाओं और सुविधाओं से वंचित हैं।

गरियाबंद जिले के घने जंगलों के बीच स्थित सुखरीडबरी गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क नहीं है। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला कच्चा रास्ता बरसात के दिनों में दलदल में तब्दील हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों का गांव से बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को उठानी पड़ती है।

शिक्षा व्यवस्था बदहाल, स्कूल भवन के अभाव में अतिरिक्त भवन मे लग रही कक्षाएं

गांव में प्राथमिक विद्यालय संचालित तो है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की हालत चिंताजनक बनी हुई है। स्कूल भवन नहीं होने के कारण पिछले लगभग दस वर्षों से अतिरिक्त भवन में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे गांवों में जाना पड़ता है। बरसात के मौसम में खराब रास्तों के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है।

पानी और सामुदायिक भवन की समस्या

ग्रामीणों के सामने पीने के पानी और दैनिक उपयोग के पानी की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। गांव में सामुदायिक भवन नहीं होने के कारण ग्राम सभाओं, सामाजिक बैठकों और अन्य सामुदायिक कार्यक्रमों के आयोजन में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

राशन के लिए 3 किलोमीटर, इलाज के लिए 10 किलोमीटर की दूर

सुखरीडबरी के ग्रामीणों को राशन लेने के लिए लगभग तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए करीब दस किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में रास्ता पूरी तरह बाधित हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, राशन वितरण और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं। उनका कहना है कि गांव में सड़क, पेयजल व्यवस्था और सामुदायिक भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं की तत्काल आवश्यकता है।

करोड़ों की परियोजना के बावजूद अधूरे विकास कार्य
ग्रामीणों के अनुसार लगभग दस वर्ष पूर्व सुखरीडबरी को गोद ग्राम के रूप में विकसित करने के लिए करोड़ों रुपये की परियोजना स्वीकृत कराई थी। कुछ विकास कार्य जरूर हुए, लेकिन कई महत्वपूर्ण योजनाएं अधूरी रह गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार के कारण गांव की तस्वीर नहीं बदल पाई।
शासकीय योजनाओं के लाभ से भी वंचित है

राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिलने के कारण गांव के कई लोग आज भी पेंशन, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न शासकीय लाभों से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर कई बार मांग करने के बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

विकास की राह देख रहा सुखरीडबरी

विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाति के इस गांव की स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि विकास की कई योजनाएं आज भी दूरदराज के आदिवासी अंचलों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं। ग्रामीण अब शासन-प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सुखरीडबरी को राजस्व ग्राम का दर्जा मिले और सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।

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