रायगढ़ जिले के सरिया, बरमकेला और चंद्रपुर क्षेत्र में फैले डोलोमाइट खनन को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। 6 और 7 अप्रैल को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य, पर्यावरण और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
खनन से प्रभावित हो रहा पर्यावरण और जनजीवन
क्षेत्र में वर्षों से जारी खनन और क्रशर संचालन के चलते हवा, पानी और जमीन पर असर पड़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि धूल और प्रदूषण के कारण दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
उत्पादन बढ़ाने के प्रस्ताव पर जनसुनवाई
कटंगपाली और साल्हेओना क्षेत्र में पांच फर्मों द्वारा डोलोमाइट उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 6 और 7 अप्रैल को जनसुनवाई आयोजित की जानी है। प्रस्ताव के अनुसार, उत्पादन बढ़ने पर हर साल लगभग 5 लाख टन अतिरिक्त डोलोमाइट निकाला जा सकता है।
आर्यन मिनरल्स की क्षमता वृद्धि का प्रस्ताव
7 अप्रैल को आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड की जनसुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें उत्पादन क्षमता को 1 लाख टन से बढ़ाकर 2,00,198 टन प्रतिवर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है। कंपनी को वर्ष 2017 में खनन लीज स्वीकृत हुई थी, जिसकी अवधि 2067 तक निर्धारित है।
स्वास्थ्य जांच और डेटा को लेकर चिंता
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा भी उठाया जा रहा है कि लंबे समय से खनन कार्य होने के बावजूद मजदूरों और आसपास के निवासियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। साथ ही, प्रदूषण के प्रभाव से जुड़ा कोई आधिकारिक डेटा भी सामने नहीं आया है।
राजस्व बनाम स्वास्थ्य पर बहस
खनन से मिलने वाले राजस्व को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सकारात्मक दृष्टिकोण है, लेकिन इसके साथ ही स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा हो रही है।
जनसुनवाई की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
जनसुनवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। कई बार सूचना की कमी और प्रक्रिया की जटिलता के कारण प्रभावित लोगों की आवाज पूरी तरह सामने नहीं आ पाती।
