संयुक्त कार्रवाई के बाद उर्वरक विक्रय पर लगाया गया था प्रतिबंध; गैर-सरकारी खाद के स्रोत और दस्तावेजों की जांच को लेकर उठ रहे सवाल
सूरजपुर। ग्राम द्वारिकापुर में 3 जुलाई को हुई संयुक्त कार्रवाई के बाद अब कृषि विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कार्रवाई के दौरान जहां मंडी विभाग ने बड़ी मात्रा में धान जब्त कर शुल्क एवं प्रशमन राशि की वसूली की, वहीं संबंधित प्रतिष्ठान में मिले उर्वरक को लेकर कृषि विभाग की कार्रवाई चर्चा में है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई के बाद संबंधित दुकान के उर्वरक विक्रय पर 21 दिनों का प्रतिबंध लगाया गया था। प्रतिबंध की अवधि समाप्त होने के बाद दुकान दोबारा संचालित होने लगी। इसी को लेकर सवाल उठ रहा है कि कार्रवाई के दौरान सामने आई उर्वरक संबंधी अनियमितताओं की जांच किस स्तर तक पहुंची और दुकान को दोबारा खोलने की अनुमति किन आधारों पर दी गई।
गैर-सरकारी खाद के स्रोत की जांच पर सवाल
मामले में सबसे अहम प्रश्न दुकान में मिले गैर-सरकारी उर्वरक को लेकर है। यदि निरीक्षण के दौरान उर्वरक स्टॉक में अनियमितता पाई गई थी, तो उसके खरीद बिल, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रिकॉर्ड और आपूर्तिकर्ता की जांच किया जाना आवश्यक था।
यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित खाद वैध स्रोत से खरीदी गई थी या नहीं। यदि दस्तावेज उपलब्ध थे तो उनका सत्यापन किस स्तर पर किया गया और यदि दस्तावेजों में कमी थी तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई—इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है।
21 दिन बाद दुकान खोलने के फैसले पर चर्चा
प्रतिबंध की अवधि पूरी होने के बाद दुकान संचालन बहाल किए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि संबंधित संचालक को नियमों का पालन करने और स्टॉक रजिस्टर नियमित रूप से संधारित करने की हिदायत दी गई।
यदि यह प्रक्रिया विभागीय नियमों के अनुरूप थी, तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निरीक्षण के बाद क्या निष्कर्ष निकला और किन दस्तावेजों के आधार पर दुकान दोबारा संचालित करने की अनुमति दी गई।
बिल और रिकॉर्ड के सत्यापन की मांग
क्षेत्र में कार्रवाई के बाद पुराने दिनांक के बिल अथवा दस्तावेज तैयार किए जाने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बिल की तारीख, बिल नंबर, खरीद स्रोत, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और संबंधित आपूर्तिकर्ता के रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि कार्रवाई के समय दस्तावेज उपलब्ध थे या बाद में प्रस्तुत किए गए।
मंडी विभाग की कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने
3 जुलाई की कार्रवाई में मंडी विभाग की ओर से 750 बोरी यानी करीब 300 क्विंटल धान जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा मंडी शुल्क, कृषक कल्याण शुल्क और प्रशमन राशि सहित 73,491 रुपये की वसूली का रिकॉर्ड भी बताया जा रहा है।
इसके विपरीत उर्वरक मामले में 21 दिन का प्रतिबंध लगाए जाने के बाद आगे की कार्रवाई और गैर-सरकारी खाद के स्रोत की जांच का परिणाम सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
कृषि विभाग से उठ रहे ये सवाल
- दुकान में मिला गैर-सरकारी उर्वरक कहां से खरीदा गया था?
- क्या उसके खरीद बिल और आपूर्तिकर्ता का सत्यापन किया गया?
- क्या स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक का मिलान हुआ?
- उर्वरक संबंधी अनियमितता पाए जाने पर आगे क्या कार्रवाई की गई?
- 21 दिन का प्रतिबंध लगाने का आधार क्या था?
- प्रतिबंध समाप्त होने के बाद दुकान संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई?
- क्या दुकान दोबारा खोलने से पहले निरीक्षण किया गया?
- प्रस्तुत दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन कराया गया या नहीं?
दस्तावेज सामने आने पर साफ होगी तस्वीर
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट है कि मामले में मंडी विभाग की कार्रवाई और कृषि विभाग की उर्वरक संबंधी कार्रवाई अलग-अलग स्तर पर हुई। ऐसे में पूरे प्रकरण में पारदर्शिता के लिए कृषि विभाग द्वारा निरीक्षण रिपोर्ट, प्रतिबंध आदेश, दस्तावेज सत्यापन और दुकान संचालन बहाल करने के आधार को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा।
यदि सभी कार्रवाई नियमों के अनुरूप हुई है तो संबंधित दस्तावेजों से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं यदि जांच में कोई गंभीर अनियमितता सामने आई थी, तो उसके बाद की कार्रवाई पर भी विभाग को स्पष्टीकरण देना होगा।


