बिलासपुर। पुलिस कार्रवाई के कथित दुरुपयोग और एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ लगातार दर्ज किए गए आपराधिक मामलों से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मुंगेली के अपराध क्रमांक 243/2021 से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।
2019 से 2021 के बीच एक परिवार के खिलाफ 8 FIR
मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि वर्ष 2019 से 2021 के बीच एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर कुल आठ आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। कई मामलों में परिवार के लगभग वही सदस्य आरोपी बनाए गए।
जांच के दौरान पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने इन आठ मामलों को फर्जी पाया। राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश शपथपत्र में भी जांच अधिकारी की लापरवाही का उल्लेख किया गया और संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी दी गई।
एक विवाद के बाद अलग-अलग जिलों में दर्ज हुए मामले
मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2017 से जुड़ी बताई गई है। याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, परिवार की एक महिला का पीयूष तिवारी नामक व्यक्ति से संपर्क हुआ था। आरोप था कि उसने स्वयं को अविवाहित पुलिस अधिकारी बताते हुए महिला को विवाह का भरोसा दिया।
बाद में उसके पहले से विवाहित होने की जानकारी सामने आने पर महिला ने संबंध समाप्त कर लिए। इसके बाद उसने 5 अप्रैल 2018 को आर्य समाज केंद्र, बिलासपुर में विवाह कर लिया।
याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, इसके बाद पीयूष तिवारी की ओर से संबंध बनाए रखने का दबाव बनाया गया और निजी तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी दी गई। इसके बाद महिला, उसके पति और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ अलग-अलग थानों एवं जिलों में मामले दर्ज होते चले गए।
कई थानों में दर्ज हुईं FIR
मामले में रायपुर के मोदहापारा थाने में अपराध क्रमांक 107/2019, दुर्ग के कुम्हारी थाने में 192/2019, पुरानी भिलाई थाने में 412/2020 तथा मुंगेली क्षेत्र में 14/2021, 58/2021, 243/2021 और 328/2021 सहित अन्य मामले दर्ज किए गए थे।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि एक ही विवाद के बाद अलग-अलग स्थानों पर लगातार FIR दर्ज कर परिवार के सदस्यों को आपराधिक मामलों में उलझाया गया।
SIT की जांच में सामने आई अलग तस्वीर
मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब पुलिस की विशेष जांच टीम ने मामलों की जांच की। याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, SIT ने आठों मामलों को फर्जी पाया।
राज्य सरकार के शपथपत्र में जांच अधिकारी की लापरवाही का उल्लेख किया गया। साथ ही संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई।
तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की भूमिका का भी उल्लेख
मामले में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अरविंद कुजूर की कथित संलिप्तता का भी राज्य सरकार के शपथपत्र में उल्लेख किया गया। सरकार के अनुसार, तत्कालीन डीजीपी ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी थी।
हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों को समग्र रूप से देखते हुए आपराधिक कार्यवाही जारी रखने को उचित नहीं माना।
हाईकोर्ट ने पूरी कार्यवाही की रद्द
डिवीजन बेंच ने मुंगेली के अपराध क्रमांक 243/2021 से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्याय के हित में उचित नहीं माना।
यह फैसला पुलिस कार्रवाई, FIR के कथित दुरुपयोग और जांच अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाता है। मामले में SIT की जांच और राज्य सरकार के शपथपत्र में सामने आए तथ्यों को भी अदालत ने समग्र परिस्थितियों के संदर्भ में देखा।
रिपोर्टर: अभिषेक कुमार पाण्डेय
बिलासपुर, छत्तीसगढ़




