संरक्षण के आरोपों से घिरे डीईओ की फजीहत, खबर सामने आते ही बीईओ प्रेमनगर को नोटिस

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सूरजपुर। सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़े एक गंभीर प्रकरण में दोषी अधिकारी को संरक्षण देने के आरोपों के बीच जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सूरजपुर की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मामला सार्वजनिक होने और आलोचना तेज होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) प्रेमनगर प्रताप सिंह पैकरा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

जारी नोटिस में बीईओ को तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

आरटीआई प्रकरण में सामने आए गंभीर आरोप

जानकारी के अनुसार, सूचना के अधिकार से जुड़े इस प्रकरण में समय-सीमा समाप्त होने के बाद कथित रूप से अवैध सूचना शुल्क वसूली, बैक डेट में पत्र जारी करने और रसीद देने जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे।

हैरानी की बात यह है कि इस मामले में प्रथम अपील की सुनवाई भी हो चुकी थी, इसके बावजूद कई सप्ताह तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे प्रशासनिक निष्क्रियता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे थे।

शिक्षक संघ ने लगाए संरक्षण के आरोप

इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष यादवेन्द्र दुबे ने जिला शिक्षा अधिकारी अजय कुमार मिश्रा पर दोषी अधिकारी को बचाने का आरोप लगाया था। मामला सार्वजनिक होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे।

कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रथम अपील की सुनवाई 22 जनवरी 2026 को हो चुकी थी और कथित अनियमितताएं सामने आ चुकी थीं, तो फिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों की गई।

जानकारों का मानना है कि यदि बैक डेट में पत्र और रसीद जारी करने के आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह केवल सूचना देने में देरी का मामला नहीं है। यह शासकीय अभिलेखों में कूट रचना, मिथ्या प्रविष्टि और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आपराधिक कृत्यों की श्रेणी में भी आ सकता है।

आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

फिलहाल नोटिस जारी होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह कार्रवाई विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम साबित होती है या फिर बढ़ते विवाद के बीच औपचारिक प्रक्रिया भर रह जाती है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सूरजपुर के शिक्षा विभाग की प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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