रिपोर्टर: अभिषेक कुमार पाण्डेय
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
बिलासपुर। रतनपुर के महामाया चौक में आधी रात हुई लूट की वारदात का पुलिस ने चंद घंटों में खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दो बालिग और तीन विधि से संघर्षरत बालक शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1000 रुपये नगद और वारदात में प्रयुक्त ऑटो जब्त किया है।
इलाज कराकर घर लौट रहा था प्रार्थी
पुलिस के अनुसार ग्राम कर्रा निवासी युवराज सिंह प्रधान ने 17 अगस्त 2026 को रतनपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वह इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर आया था। इलाज कराने के बाद रात करीब 12 बजे वह वापस अपने घर लौट रहा था।
इसी दौरान महामाया चौक स्थित कृष्णा ट्रेडर्स के पास ऑटो क्रमांक CG 10 CD 7944 में सवार कुछ युवक पहुंचे और उसे रोक लिया।
डंडे का भय दिखाकर रुपये लूटने का आरोप
शिकायत के मुताबिक ऑटो सवार युवकों ने गाली-गलौज करते हुए उससे पैसों की मांग की। युवराज सिंह ने जब पैसे नहीं होने की बात कही तो आरोपियों ने डंडे का भय दिखाकर जान से मारने की धमकी दी और उसकी पेंट की जेब से 1200 रुपये लूटकर मौके से फरार हो गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी रतनपुर निरीक्षक निलेश पाण्डेय ने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम गठित कर आरोपियों और वारदात में इस्तेमाल ऑटो की तलाश शुरू की गई।
ईमलीभाठा और सरकंडा क्षेत्र में पुलिस की दबिश
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि ऑटो सवार युवक ईमलीभाठा, सरकंडा क्षेत्र के रहने वाले हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने संदिग्धों के घरों में घेराबंदी कर राहुल दुबे (25), पिता रामजी दुबे, निवासी ईमलीभाठा सरकंडा और पवन कुमार गौहर (19), पिता कगरधारी गौहर, निवासी ईमलीभाठा सरकंडा सहित तीन विधि से संघर्षरत बालकों को अभिरक्षा में लिया।
पूछताछ में वारदात स्वीकार करने का दावा
पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपियों ने लूटपाट की घटना को अंजाम देना स्वीकार किया। उनके कब्जे से 1000 रुपये नगद और घटना में प्रयुक्त ऑटो बरामद किया गया।
पुलिस ने दोनों बालिग आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ तीनों विधि से संघर्षरत बालकों को अभिरक्षा में लेकर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की है।
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक निलेश पाण्डेय, सहायक उपनिरीक्षक नीलाकर सेठ, आरक्षक आकाश डोंगरे, धीरज कश्यप, देवानंद चन्द्राकर, बसंत मानिकपुरी, हरनारायण नेटी, मोरध्वज चन्द्रा और धनराज कुम्भकार का विशेष योगदान रहा।




