✍️ अभिषेक कुमार पाण्डेय, रिपोर्टर
बिलासपुर। जिले की शिक्षा व्यवस्था और बोर्ड परीक्षाओं के कमजोर परिणामों को लेकर प्रशासन भले ही सख्त नजर आ रहा हो, लेकिन शिक्षा विभाग में लगातार बदल रहे जिला शिक्षा अधिकारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पिछले करीब 13 महीनों में तीन अधिकारियों के बदलने और वर्तमान प्रभारी DEO के भी सेवानिवृत्त होने के चलते विभाग में स्थायित्व को लेकर चिंता बढ़ गई है।

13 महीने में बदले तीन अधिकारी
पूर्व DEO डॉ. अनिल तिवारी के बाद जिले में DEO की जिम्मेदारी विजय टांडे, रामेश्वर जायसवाल और वर्तमान में डॉ. अजय कौशिक को दी गई। लगातार नेतृत्व परिवर्तन के कारण विभागीय कामकाज और स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर असर पड़ने के सवाल उठ रहे हैं।

वर्तमान प्रभारी DEO डॉ. अजय कौशिक के 31 अगस्त को सेवानिवृत्त होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में विभाग को एक बार फिर नए अधिकारी की नियुक्ति का इंतजार रहेगा।
पदस्थापना को लेकर उठ रहे सवाल
शिक्षा विभाग के कार्यालय में अधिकारियों की पदस्थापना से जुड़ी जानकारी तो दर्ज है, लेकिन कार्यमुक्ति से संबंधित विवरण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लगातार बदलाव के बीच स्थायी और सक्षम अधिकारी की जरूरत महसूस की जा रही है।
₹30 लाख के कथित लेन-देन की चर्चा
इसी बीच DEO की महत्वपूर्ण कुर्सी को लेकर करीब 30 लाख रुपये के कथित लेन-देन की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि इस कथित लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही इसके संबंध में कोई ठोस दस्तावेज या आधिकारिक पुष्टि सामने आई है। ऐसे आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
पूर्व अधिकारियों के कार्यकाल पर भी उठे सवाल
शिक्षा विभाग के पूर्व अधिकारियों के कार्यकाल को लेकर भी अलग-अलग समय में शिकायतें और विवाद सामने आते रहे हैं। विभाग में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े आरोपों के कारण इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि प्रत्येक मामले में आरोप और जांच के अंतिम निष्कर्ष को अलग-अलग देखना जरूरी है।
खराब रिजल्ट को लेकर कलेक्टर सख्त
सत्र 2025-26 के परीक्षा परिणामों को लेकर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए हैं। स्कूलों की मॉनिटरिंग, शिक्षकों की जवाबदेही और विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार प्रशासन की प्राथमिकता बताई जा रही है।
स्थायी DEO की जरूरत
सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार बदलते नेतृत्व के बीच जिले की शिक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार की रणनीति कैसे लागू होगी। स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग, शिक्षकों की जवाबदेही और कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष योजना जैसे कार्यों के लिए विभाग को स्थायी नेतृत्व की आवश्यकता है।
अब निगाह शासन पर है कि बिलासपुर शिक्षा विभाग को कब पूर्णकालिक और सक्षम जिला शिक्षा अधिकारी मिलता है। स्थायी नेतृत्व के साथ ही खराब परीक्षा परिणामों में सुधार और विभागीय व्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती का प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा।




