‘गौशाला बदहाली’ की जमीनी हकीकत उजागर
जालौन जिले के कुठौंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रोमई मुस्तकिल में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित बृहद गौशाला इन दिनों बदहाली का शिकार है। मौके पर पहुंची मीडिया टीम ने स्थिति का जायजा लिया, जिसमें निर्माण कार्य और व्यवस्थाओं की गंभीर खामियां सामने आईं।
‘गौशाला बदहाली’ में ठेकेदार 5 माह से गायब
ग्राम प्रधान विनोद कुमार राठौर के अनुसार, गौशाला निर्माण कराने वाला ठेकेदार पिछले करीब 5 महीनों से लापता है। हैरानी की बात यह है कि अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने स्थल का निरीक्षण तक नहीं किया, जिससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है।
‘गौशाला बदहाली’ में अधूरी और घटिया निर्माण गुणवत्ता
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गौशाला का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं किया गया है। शेड की संरचना कमजोर है और हल्की हवा में भी हिलती नजर आती है। चारों ओर की गई तार फेंसिंग भी बेहद कमजोर है, जिससे गोवंश के बाहर निकलने और जंगली जानवरों के अंदर आने का खतरा बना हुआ है।
‘गौशाला बदहाली’ में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
गौशाला में न तो हरे चारे की व्यवस्था है, न बिजली की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा खाद के गड्ढे, नाली, पानी निकासी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं भी अधूरी पड़ी हैं। शासन के निर्देशानुसार सांड, गाय और बछड़ों के लिए अलग-अलग स्थान की व्यवस्था भी नहीं की गई है।
‘गौशाला बदहाली’ में पहुंच मार्ग भी बड़ी समस्या
गौशाला तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता और पुलिया का अभाव है। बम्बी (नाला) के कारण आवागमन बाधित है, जिससे बरसात के मौसम में यहां तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाएगा। यह स्थिति गोवंश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
‘गौशाला बदहाली’ के कारण संसाधनों की दोहरी बर्बादी
वर्तमान में गौशाला बंद पड़ी है, जिसके चलते भूसे को अस्थायी स्थान पर रखना पड़ रहा है। यदि नव-निर्मित गौशाला का उपयोग किया जाता तो अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता था।
‘गौशाला बदहाली’ पर प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्राम प्रधान ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि अधूरी पड़ी इस बृहद गौशाला को जल्द संचालित किया जाए और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कराई जाएं, ताकि बरसात से पहले गोवंश को सुरक्षित स्थान मिल सके।
