बिलासपुर। किसानों को साहूकारों के कर्ज और आर्थिक दबाव से राहत दिलाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ की सहकारी व्यवस्था के माध्यम से वर्ष 2026 में किसानों को 904.80 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई गई है। इस वित्तीय सहायता से किसानों को कृषि कार्यों के लिए समय पर पूंजी, खाद और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
नगद और वस्तु ऋण के जरिए किसानों को मदद
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार किसानों को कुल 904.80 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। इसमें 732.07 करोड़ रुपये का नगद ऋण तथा 172.73 करोड़ रुपये का वस्तु ऋण शामिल है।
नगद ऋण का उपयोग किसान जुताई, मजदूरी और अन्य कृषि संबंधी खर्चों के लिए कर सकते हैं, जबकि वस्तु ऋण के माध्यम से सहकारी समितियों से खाद और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
₹5 लाख तक शून्य ब्याज पर फसली ऋण
राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के माध्यम से किसानों को 5 लाख रुपये तक का अल्पकालीन फसली ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य किसानों को खेती के मौसम में समय पर संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना और उन्हें ऊंची ब्याज दर वाले अनौपचारिक कर्ज से बचाना है।
₹2 लाख तक बिना जमानत ऋण की सुविधा
केंद्र की ब्याज सबवेंशन और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जुड़ी व्यवस्था के तहत पात्र किसानों को 2 लाख रुपये तक बिना जमानत या गिरवी के ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है। इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए कृषि ऋण तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
पारदर्शी और समयबद्ध ऋण वितरण पर जोर
भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता बी.पी. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर उन्हें सीधे संस्थागत सहायता उपलब्ध कराने की है।
उन्होंने सहकारी समितियों और विभागीय अधिकारियों से ऋण वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी जरूरत के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और पात्र किसानों को समय पर सहायता मिले, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण, खाद और बीज की उपलब्धता से किसानों को खेती के शुरुआती चरण में आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद है। समय पर पूंजी और कृषि सामग्री उपलब्ध होने से उत्पादन गतिविधियों को गति मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
रिपोर्टर: अभिषेक कुमार पाण्डेय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़


