Coal Block Virodh : धरमजयगढ़ के जंगलों पर संकट, नवागांव से उठा आदिवासी प्रतिरोध का बिगुल

By
Advertisement
Advertisement

जंगल में शांति, फिर भी सियासी हलचल

धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम नवागांव में बीते कई दिनों से लगातार बैठकों का दौर जारी है। न तो अभी कोई कोयला खदान चालू है और न ही प्रत्यक्ष विवाद, फिर भी गांव में चल रही बैठकों ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इन बैठकों में भविष्य में प्रस्तावित कोल खदानों के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा हो रही है, जिसमें आसपास के कोल ब्लॉक प्रभावित ग्राम पंचायतों को साथ लेकर निर्णायक संघर्ष की तैयारी की जा रही है। यह पूरा आंदोलन Coal Block Virodh के रूप में आकार लेता दिख रहा है।

हाथियों के सुरक्षित टापू पर मंडराता खतरा

धरमजयगढ़ वन मंडल के संवेदनशील जंगल, जिन्हें जंगली हाथियों का सुरक्षित टापू माना जाता है, अब कोल ब्लॉकों के बढ़ते दबाव में हैं। जानकारी के अनुसार, इस वन क्षेत्र में कुल 18 कोल ब्लॉक चिन्हांकित किए गए हैं। इनमें से 6 कोल ब्लॉकों की नीलामी पहले ही हो चुकी है, जबकि 12 अन्य कोल ब्लॉक प्रस्तावित हैं। इससे आदिवासी समाज में गहरी चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है, जो Coal Block Virodh को और धार दे रहा है।

पारंपरिक पूजा से विरोध की शुरुआत

ग्राम नवागांव में आदिवासी ग्रामीणों ने जंगल की पूजा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कर जंगली हाथियों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की कामना की। इसके साथ ही नवागांव ईस्ट-वेस्ट कोल ब्लॉक की नीलामी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह इलाका पांचवीं अनुसूची में आता है और पेसा कानून 2022 के तहत ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी परियोजना को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह स्पष्ट रुख Coal Block Virodh को कानूनी आधार भी प्रदान करता है।

पेसा कानून का हवाला, खनन पर सीधी आपत्ति

आदिवासी ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि पेसा कानून आदिवासी स्वशासन का मूल आधार है। ग्रामसभा की अनुमति के बिना खनन न केवल असंवैधानिक होगा, बल्कि जंगल, जमीन और जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर सीधा हमला माना जाएगा। यही कारण है कि Coal Block Virodh अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई बनता जा रहा है।

29 दिसंबर को सड़कों पर उतरने का ऐलान

आंदोलन को और तेज करते हुए ग्रामीणों ने 29 दिसंबर को हजारों लोगों की रैली और आमसभा आयोजित करने की घोषणा की है। चेतावनी दी गई है कि यदि जंगल, जमीन और जंगली हाथियों की सुरक्षा से कोई समझौता किया गया, तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा। नवागांव से उठी यह आवाज अब पूरे धरमजयगढ़ क्षेत्र में Coal Block Virodh की पहचान बनती जा रही है।

Advertisement
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *