‘चार धाम’ की तर्ज पर सजेगा छत्तीसगढ़, 1000 KM शक्तिपीठ कॉरिडोर से बदलेगी प्रदेश की तस्वीर

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पांच प्रमुख देवी धाम होंगे आपस में कनेक्ट; दंतेवाड़ा से सूरजपुर तक धार्मिक पर्यटन, रोजगार और व्यापार को मिलेगा नया विस्तार

धार्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरने की तैयारी

न्यायधानी (बिलासपुर)। छत्तीसगढ़ की पावन धरा अब धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘शक्तिपीठ परियोजना’ के तहत करीब 1000 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के माध्यम से प्रदेश के पांच प्रमुख देवी धामों को आपस में जोड़ने की योजना है। यह परियोजना उत्तराखंड के चार धाम विकास मॉडल की तर्ज पर तैयार की जा रही है।

पांच प्रमुख शक्तिपीठ होंगे आपस में कनेक्ट

इस परियोजना के तहत राज्य के पांच प्रमुख आस्था केंद्रों को आधुनिक हाईवे और सुविधाओं के माध्यम से जोड़ने की योजना है। इनमें मां महामाया देवी मंदिर रतनपुर, मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर डोंगरगढ़, मां दंतेश्वरी देवी मंदिर दंतेवाड़ा, मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर चंद्रपुर और मां महामाया/बागेश्वरी देवी मंदिर कुदरगढ़ शामिल हैं।

रतनपुर से डोंगरगढ़ तक आस्था का विस्तार

रतनपुर स्थित मां महामाया देवी मंदिर को कलचुरी कालीन ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में बताया गया है। वहीं राजनांदगांव के डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर 1600 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित प्रमुख धाम है।

बस्तर से सक्ती और सरगुजा तक जुड़ेगा धार्मिक मार्ग

दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी देवी मंदिर शंखिनी-डंकिनी नदी के संगम पर स्थित बस्तर की अधिष्ठात्री देवी का पावन स्थल है। सक्ती के चंद्रपुर में मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर महानदी के तट पर स्थित आस्था का प्रमुख केंद्र है। वहीं सूरजपुर के कुदरगढ़ में मां महामाया/बागेश्वरी देवी मंदिर सरगुजा अंचल की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित सिद्धपीठ के रूप में वर्णित है।

धार्मिक पर्यटन के साथ अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

शक्तिपीठ कॉरिडोर को केवल श्रद्धालुओं की आवाजाही तक सीमित परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद जताई गई है। मार्गों के विकसित होने से धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की बात कही गई है।

सड़कों के नेटवर्क से आसान होगा सफर

परियोजना के तहत शक्तिपीठों के बीच फोर-लेन और उन्नत सड़कों का नेटवर्क तैयार किए जाने की बात कही गई है। इससे श्रद्धालुओं के लिए इन प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान और सुरक्षित होने की उम्मीद है।

होटल, कॉटेज और हस्तशिल्प बाजार पर जोर

कॉरिडोर के मार्गों पर जन-सुविधा केंद्र, होटल, कॉटेज, हस्तशिल्प बाजार और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना बताई गई है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना जताई गई है।

बस्तर से सरगुजा तक पर्यटन को विस्तार

Shaktipith Corridor Chhattisgarh के विकसित होने से धार्मिक पर्यटन के साथ प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों को भी जोड़ने की संभावना है। इस मार्ग के माध्यम से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बस्तर के जलप्रपातों, जंगलों और जनजातीय संस्कृति से लेकर सरगुजा अंचल तक के पर्यटन से परिचित होने का अवसर मिलने की बात कही गई है।

श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं की तैयारी

परियोजना के तहत शक्तिपीठ परिसरों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वच्छता, दिव्यांगजनों के लिए आसान पाथवे और विशाल पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित किए जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही ऑनलाइन दर्शन और प्रसाद प्रबंधन जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को भी परियोजना में शामिल किया गया है।

एक टूर पैकेज में पांचों शक्तिपीठों के दर्शन का लक्ष्य

परियोजना के तहत आने वाले समय में देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को एक ही टूर पैकेज के माध्यम से छत्तीसगढ़ के सभी पांचों शक्तिपीठों के दर्शन कराने का लक्ष्य बताया गया है। Shaktipith Corridor Chhattisgarh के जरिए प्रमुख देवी धामों को एक धार्मिक पर्यटन श्रृंखला के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किए जाने की जानकारी दी गई है।

आस्था और विकास को जोड़ने वाली परियोजना

करीब 1000 किलोमीटर लंबा यह प्रस्तावित शक्तिपीठ कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के प्रमुख देवी धामों को जोड़ने के साथ धार्मिक पर्यटन, स्थानीय रोजगार, व्यापार और सुविधाओं के विस्तार का माध्यम बनने की दिशा में तैयार किया जा रहा है। Shaktipith Corridor Chhattisgarh के जरिए दंतेवाड़ा से सूरजपुर तक आस्था के प्रमुख केंद्रों को एक साझा पर्यटन मार्ग से जोड़ने की योजना सामने आई है।

अभिषेक कुमार पाण्डेय | रिपोर्टर, छत्तीसगढ़

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