फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वालों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, पेंशन-ग्रेच्युटी तक रोकने का बड़ा फैसला

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बिलासपुर। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने वाले कर्मचारियों के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी की नियुक्ति गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर हुई है, तो उसे रिटायरमेंट के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभ नहीं दिए जा सकते। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए एक रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट के इस फैसले को फर्जी प्रमाण पत्र मामलों में अहम माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामला
मामला रायपुर के कृष्णापुरी अमलीडीह निवासी पीएल नायक से जुड़ा है। उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग के तहत बंजारा जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा में सहायक संचालक के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी। बाद में वे जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय में डिप्टी डायरेक्टर पद तक पहुंचे और 30 जून 2021 को सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद विभाग ने उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी, जीपीएफ सहित अन्य लाभों पर रोक लगा दी थी। इसके बाद उन्होंने उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी
पीएल नायक की ओर से अदालत में कहा गया कि उन्होंने किसी तरह की धोखाधड़ी नहीं की और न ही कोई जालकारी छिपाई, उनका तर्क था कि लंबे समय तक सेवा देने के बाद रिटायरमेंट लाभ रोकना अनुचित है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र की जांच किसी भी समय की जा सकती है, चाहे कर्मचारी रिटायर ही क्यों न हो चुका हो। अदालत ने साफ किया कि कर्मचारी से सेवा अवधि के दौरान मिला वेतन वापस नहीं लिया जाएगा, लेकिन नियुक्ति का आधार ही अवैध होने पर भविष्य के सेवा लाभ नहीं दिए जा सकते।

758 मामलों की हुई जांच
राज्य सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि राज्य गठन के बाद से अब तक फर्जी जाति प्रमाण पत्र के 758 मामलों की जांच की गई। इनमें से 267 प्रमाण पत्र अमान्य पाए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने उन अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची भी जारी की है, जिनके जाति प्रमाण पत्र जांच समिति द्वारा निरस्त किए गए।

फैसले के बाद बढ़ सकती है कार्रवाई
कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों में कार्रवाई और तेज हो सकती है। साथ ही सरकारी विभागों में लंबित जांचों को भी गति मिलने की संभावना है।

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