पेंड्रारोड विशेष अदालत ने 21 अप्रैल 2025 को गौरेला के सुमन निकेतन के पास हुई भयावह घटना में दोषियों को दंडित किया
पेंड्रारोड की विशेष अपर सत्र न्यायालय ने एक नाबालिग से यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में त्वरित न्याय करते हुए दो आरोपियों को कठोर सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों आदेश उर्फ अंशु जॉन (कोरबा) और विकास मसीह उर्फ लाली (बलौदाबाजार) को पॉक्सो एक्ट और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत 10-10 साल कठोर कारावास की सजा दी।
न्यायालय ने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिग के साथ किया गया यह कृत्य न केवल जघन्य है, बल्कि इसका पीड़ित की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा है। न्याय के हित में दोषियों को कठोरतम दंड देना आवश्यक था।
घटना का विवरण: रात 8 बजे जंगल में हुई नृशंस वारदात
घटना 21 अप्रैल 2025 की रात लगभग 8 बजे हुई, जब पीड़ित अपने दोस्त के घर जा रहा था। रास्ते में आरोपियों ने उसे जबरन रोक लिया और मोटरसाइकिल पर बैठाकर सुमन निकेतन चर्च के पीछे जंगल में ले गए। वहां आरोपियों ने पीड़ित के साथ कुकर्म किया और उसका वीडियो भी बनाया। आरोपियों ने धमकी दी कि यदि किसी को बताया तो उसे जान से मार देंगे, साथ ही मारपीट भी की।
पीड़ित की शिकायत पर गौरेला थाना में अपराध क्रमांक 103/2025 दर्ज किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों आरोपियों को धारा-3 और धारा-4 पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया और उन्हें 10-10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई।
अर्थदंड और पीड़ित का पुनर्वास
न्यायालय ने आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह राशि पीड़ित को उसके चिकित्सा व्यय और पुनर्वास के लिए दी जाएगी। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जो मुख्य सजा के साथ-साथ चलेगी। अर्थदंड की अदायगी में चूक होने पर 3 महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
इस मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह ने की। यह फैसला घटना के 11 महीने के भीतर आया, जो न्याय प्रक्रिया में तेजी और गंभीरता का उदाहरण है।

