गोल बाजार की 58 साल पुरानी मटकी फोड़ स्पर्धा से यादव समाज की शोभायात्रा तक प्रशासन के फैसले का इंतजार; मंदिरों में जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी
बिलासपुर। न्यायधानी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार आस्था और उत्साह के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर असमंजस के बीच मनाई जा रही है। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में दो पक्षों के बीच हुए विवाद के बाद लागू धारा-144 के कारण शहर के कई बड़े पारंपरिक आयोजनों को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
घोंघा बाबा मंदिर का मध्यरात्रि जन्मोत्सव, गोल बाजार की ऐतिहासिक मटकी फोड़ प्रतियोगिता, करोना चौक की मलखंभ स्पर्धा और यादव समाज की पारंपरिक शोभायात्रा जैसे आयोजनों के लिए आयोजक प्रशासनिक अनुमति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
58 साल पुरानी मटकी फोड़ प्रतियोगिता पर भी अनिश्चितता
गोल बाजार में करीब 58 वर्षों से मटकी फोड़ प्रतियोगिता आयोजित होती आ रही है। इस बार करीब 50 फीट ऊंची मटकी फोड़ने की परंपरागत स्पर्धा को लेकर भी आयोजन समिति प्रशासन की अनुमति का इंतजार कर रही है।
इसी तरह करोना चौक युवा मंच की ओर से प्रस्तावित मलखंभ प्रतियोगिता की तैयारियां पूरी होने की बात कही जा रही है, लेकिन आयोजन की अंतिम अनुमति अभी लंबित बताई गई है।
घोंघा बाबा मंदिर में प्रतियोगिता रद्द
घोंघा बाबा मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इस वर्ष ‘राधा-कृष्ण सजाओ’ प्रतियोगिता आयोजित नहीं करने का निर्णय लिया गया है।
हालांकि मंदिर में मध्यरात्रि जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां जारी हैं।
यादव समाज की शोभायात्रा पर भी नजर
यादव समाज की पारंपरिक शोभायात्रा भी इस बार प्रशासनिक अनुमति पर निर्भर है। लखीराम ऑडिटोरियम से प्रस्तावित शोभायात्रा में करीब 60 महिलाओं के करमा नृत्य सहित दुकालू यादव और उनकी टीम की प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं।
बताया गया है कि शोभायात्रा का प्रस्तावित मार्ग भी धारा-144 के दायरे में आता है। ऐसे में आयोजन को लेकर प्रशासन के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
मंदिरों में जारी है जन्मोत्सव की तैयारी
बड़े सार्वजनिक आयोजनों को लेकर भले ही असमंजस बना हुआ हो, लेकिन मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
व्यंकटेश मंदिर में नागपंचमी से चल रहा झूला उत्सव जन्माष्टमी पर अपने चरम पर रहेगा। मंदिर में भगवान के विभिन्न स्वरूपों की झांकियां सजाई गई हैं।
जन्माष्टमी के दिन सुबह 5 बजे शास्त्रीय संगीत के बीच भगवान का विशेष अभिषेक प्रस्तावित है। मंदिर परिसर में तीन विशेष झांकियां भी तैयार की गई हैं।
100 किलो पंजीरी का महाप्रसाद
जन्मोत्सव के लिए मंदिर के करीब 30 विद्यार्थियों द्वारा 100 किलो विशेष पंजीरी तैयार किए जाने की जानकारी दी गई है। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया जाएगा।
मंदिर के महंत डॉ. कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में पुलिस और प्रशासन को पत्र भेजा गया है और शांतिपूर्ण आयोजन की तैयारी की जा रही है।
शुभ संयोगों के बीच मनाई जाएगी जन्माष्टमी
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष 4 सितंबर को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी को विशेष माना जा रहा है। अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग और वृष राशि के चंद्रमा का संयोग पर्व को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा है। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का पूजन किया जाएगा।
शांति समिति की बैठक के बाद तय होगी तस्वीर
बड़े आयोजनों को लेकर अंतिम निर्णय पुलिस और प्रशासन की समीक्षा के बाद होने की संभावना है। एसएसपी रजनेश सिंह के अनुसार शांति समिति की बैठक बुलाई गई है और संबंधित थानों से जमीनी स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई है। इन्हीं रिपोर्टों और बैठक में सामने आने वाले सुझावों के आधार पर आयोजनों की अनुमति को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
यदि अनुमति मिलती है तो आयोजन समितियों और संबंधित संगठनों की भी सुरक्षा एवं व्यवस्था में जिम्मेदारी तय की जाएगी।
अब सभी की निगाहें प्रशासन की बैठक और निर्णय पर टिकी हैं। फैसला यह तय करेगा कि इस बार बिलासपुर में वर्षों पुरानी मटकी फोड़, मलखंभ और शोभायात्रा जैसी परंपराएं सुरक्षा शर्तों के साथ जारी रहेंगी या नहीं।
अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़


