दो घंटे की बारिश में ही डूबा बिलासपुर, प्रमुख सड़कें बनीं तालाब

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श्रीकांत वर्मा मार्ग पर दो फीट तक पानी, हंसा विहार से विनोबा नगर तक जलभराव; नालियों और ड्रेनेज व्यवस्था पर उठे सवाल

बिलासपुर। मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर किए जाने वाले दावों के बीच मंगलवार को हुई करीब दो घंटे की तेज बारिश ने शहर की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। बारिश के दौरान बिलासपुर की कई प्रमुख सड़कों और रिहायशी इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। कई स्थानों पर सड़कें तालाब जैसी नजर आईं और वाहन चालकों को पानी तथा गड्ढों के बीच से गुजरना पड़ा।

श्रीकांत वर्मा मार्ग पर दो फीट तक पानी

शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्गों में शामिल श्रीकांत वर्मा मार्ग पर बारिश के दौरान करीब दो फीट तक पानी जमा होने की स्थिति सामने आई। सड़क पर पानी भरने के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई।

जलभराव के कारण सड़क के गड्ढे पानी के नीचे छिप गए, जिससे दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई वाहन चालक संभलकर आगे बढ़ते नजर आए और दुर्घटना की आशंका भी बनी रही।

कई इलाकों में जल निकासी व्यवस्था प्रभावित

बारिश के दौरान हंसा विहार, विद्यानगर, विनोबा नगर, बंधवापारा और चौबे कॉलोनी समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। तेज बारिश के दबाव में छोटी नालियों का पानी कई जगह सड़कों की ओर फैल गया।

स्थानीय लोगों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह रही कि कम समय में हुई तेज बारिश का पानी तत्काल नहीं निकल सका।

बारिश थमने के बाद धीरे-धीरे सामान्य हुई स्थिति

हालांकि राहत की बात यह रही कि बारिश रुकने के बाद पानी धीरे-धीरे नालियों और जल निकासी मार्गों से निकलने लगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बड़े पैमाने पर घरों के भीतर पानी घुसने की स्थिति नहीं बनी, लेकिन कुछ समय के लिए प्रमुख मार्गों पर आवागमन प्रभावित रहा।

दो घंटे की बारिश ने खड़े किए बड़े सवाल

शहर में अभी लंबे समय तक लगातार मूसलाधार बारिश का दौर सामने नहीं आया है। ऐसे में अपेक्षाकृत कम अवधि की तेज बारिश में ही कई इलाकों में जलभराव होना नगर निगम की मानसून पूर्व तैयारियों पर सवाल खड़े करता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आने वाले दिनों में कई घंटे तक लगातार भारी बारिश होती है, तो शहर की मौजूदा जल निकासी व्यवस्था कितना दबाव झेल पाएगी।

नालों की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत

बारिश के बाद सामने आई स्थिति ने नालों की सफाई, छोटी नालियों की क्षमता और प्राकृतिक जल बहाव के रास्तों को लेकर नए सिरे से समीक्षा की जरूरत महसूस कराई है। नागरिकों का कहना है कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान केवल बारिश के समय टैंकर या पंप लगाने से नहीं, बल्कि व्यवस्थित ड्रेनेज नेटवर्क और नियमित रखरखाव से ही संभव है।

अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़

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