हाईकोर्ट के फैसले से लिपिक वर्ग को बड़ी राहत, कंप्यूटर परीक्षा के नाम पर वेतन वसूली पर रोक

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WPS No. 9471/2023 में आदेश, 2013 के बाद नियुक्त लिपिकों से जुड़ा मामला; संघ के ज्ञापन को भी न्यायालय के समक्ष दस्तावेजी आधार के रूप में रखा गया

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के लिपिक संवर्ग से जुड़े कर्मचारियों को हाईकोर्ट के एक फैसले से राहत मिली है। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने WPS No. 9471/2023, श्रवण कुमार सिंह बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले में आदेश पारित करते हुए वेतन वसूली से जुड़े आदेश को निरस्त किया है। मामले को लेकर लिपिक संघ ने इसे कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला बताया है।

 

नियुक्ति शर्तों में ‘या’ और ‘एवं’ के अर्थ पर अदालत की टिप्पणी

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता की नियुक्ति सहायक ग्रेड-3 के पद पर हुई थी। संघ की ओर से सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग को दिए गए ज्ञापन में तर्क रखा गया था कि अनुकंपा नियुक्ति में हिंदी मुद्रलेखन अथवा कंप्यूटर डिप्लोमा की शर्त विकल्प के रूप में है। साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग के 17 फरवरी 2004 के परिपत्र और वर्ष 2013 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कंप्यूटर योग्यता रखने वाले कर्मचारियों को नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान दिए जाने की बात कही गई थी।

संघ के अनुसार, हाईकोर्ट ने अपने आदेश के पैरा 6 और 7 में नियुक्ति आदेश में प्रयुक्त ‘/’ के अर्थ को ‘या’ के रूप में माना है। अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि याचिकाकर्ता के पास नियुक्ति से पहले ही कंप्यूटर डिप्लोमा था।

वसूली आदेश निरस्त, नियमित वेतनमान बहाल

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, 13 मई 2019 को जारी वसूली आदेश को निरस्त किया गया है। वहीं 8 सितंबर 2017 से दिए गए नियमित वेतनमान को बहाल करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा पदोन्नति से संबंधित भी निर्देश जारी किए गए हैं।

संघ के मुताबिक, बिना उचित नोटिस के की गई वेतन वसूली को भी न्यायालय के आदेश में स्वीकार्य नहीं माना गया है।

संघ ने बताया कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण आदेश

लिपिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने इस फैसले को कर्मचारियों के हित से जुड़ा महत्वपूर्ण आदेश बताया। उन्होंने कहा कि संघ द्वारा नवंबर 2024 में सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, महानदी भवन, नया रायपुर को सौंपे गए मांग पत्र में जिन बिंदुओं को उठाया गया था, उन्हें मामले में दस्तावेजी आधार के रूप में रखा गया।

रोहित तिवारी के अनुसार, प्रदेश में ऐसे कई कर्मचारी हैं, जिनके वेतन, पदोन्नति या कंप्यूटर योग्यता से जुड़े मामलों में समान परिस्थितियां बनी हैं। संघ अब हाईकोर्ट के आदेश को संबंधित विभागों और विभागाध्यक्षों के समक्ष रखते हुए इसके आधार पर समान मामलों में राहत दिलाने की दिशा में पहल करेगा।

सैकड़ों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद

संघ का कहना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश उन कर्मचारियों के मामलों में महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है, जिनसे कंप्यूटर योग्यता अथवा परीक्षा के आधार पर वेतन की वसूली की गई है। हालांकि, किसी अन्य कर्मचारी के मामले में इस आदेश का स्वतः लागू होना संबंधित नियुक्ति शर्तों, विभागीय आदेशों और मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा।

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