रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में चल रहा माओवादी विरोधी अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। सुरक्षा बलों ने पारंपरिक रणनीतियों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक को भी प्रमुख हथियार के रूप में अपनाया है, जिससे माओवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होता दिख रहा है।
🔹 अत्याधुनिक तकनीक से बढ़ी निगरानी
सुरक्षा बलों द्वारा ड्रोन, सैटेलाइट सर्विलांस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल लोकेशन ट्रैकिंग जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इससे जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों में भी 24 घंटे निगरानी संभव हो गई है और माओवादी ठिकानों की पहचान आसान हुई है।
🔹 बड़े पैमाने पर कार्रवाई के आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में सुरक्षा बलों ने
- 536 माओवादियों को ढेर किया है
- 2,038 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है
- 2,900 से अधिक ने आत्मसमर्पण किया है
- 1,258 हथियार बरामद किए गए हैं
इनमें एके-47, एसएलआर, इंसास और एलएमजी जैसी घातक राइफलें शामिल हैं।
🔹 खुफिया नेटवर्क को बड़ा झटका
ड्रोन और सैटेलाइट आधारित रीयल-टाइम इनपुट से माओवादियों के खुफिया नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां सटीक कार्रवाई की जा रही है, जिससे उनकी रणनीतिक क्षमता कमजोर हुई है।
🔹 ‘ट्रिपल ए’ रणनीति से दबाव
सुरक्षा बलों ने एग्रेसिव एक्शन, एरिया डॉमिनेशन और एडमिनिस्ट्रेटिव रीच यानी “ट्रिपल ए” रणनीति के तहत अभियान तेज किया है। डीआरजी, कोबरा और बस्तर फाइटर जैसी इकाइयों की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण रही है।
🔹 सुरक्षा ढांचे का विस्तार
अबूझमाड़ सहित दुर्गम इलाकों में 600 से अधिक सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। साथ ही 68 नाइट-लैंडिंग हेलिपैड बनाए गए हैं, जिससे लॉजिस्टिक और त्वरित कार्रवाई क्षमता में सुधार हुआ है।
🔹 पुनर्वास नीति से बढ़े आत्मसमर्पण
नई पुनर्वास नीति 2025 के तहत माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके चलते आत्मसमर्पण की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।
🔹 सरकार की बदलती रणनीति
राज्य गठन के बाद से माओवाद के खिलाफ रणनीतियां लगातार बदलती रही हैं, जबकि वर्तमान सरकार ने केंद्र के सहयोग से समयबद्ध और निर्णायक कार्रवाई की नीति अपनाई है।
