हंडी चौक के दुर्गा पंडाल में आरती कर निभाते हैं धार्मिक परंपरा,
हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दे रही समिति
रायगढ़। धर्म और आस्था की राहें भले अलग हों, लेकिन आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव की भावना सभी को एक सूत्र में बांधती है। रायगढ़ शहर के हंडी चौक में दुर्गा पूजा के दौरान कुछ ऐसी ही खूबसूरत तस्वीर देखने को मिलती है, जहां कांग्रेस पार्षद एवं नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया मां दुर्गा की आरती कर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हैं। दुर्गा पूजा आयोजन से उनका जुड़ाव वर्षों पुराना है। वे वर्ष 1989 से हंडी चौक दुर्गा पूजा समिति की अगुवाई करते आ रहे हैं।
आज जब कई बार धर्म के नाम पर समाज में दूरियां पैदा करने की कोशिश होती है, तब रायगढ़ के हंडी चौक की यह तस्वीर संदेश देती है कि आस्था के साथ इंसानियत, प्रेम और भाईचारे को भी उतनी ही अहमियत दी जानी चाहिए। सलीम नियारिया का दुर्गा पूजा आयोजन से वर्षों पुराना जुड़ाव इसी साझा संस्कृति की एक जीवंत मिसाल है। और खास बात ये है शहर में सलीम नियारिया को लोग प्यार से प्यारे चाचा सलीम चाचा से संबोधित करते हैं।

आयोजन में सभी धर्मो की सहभागिता –
हंडी चौक दुर्गा पूजा समिति में केवल सलीम नियारिया ही नहीं, बल्कि सभी समाज धर्मों के लोगों की सहभागिता होती है। और यहां के पदाधिकारियों की यही कोशिश होती है देश प्रदेश में सभी धर्मो में आपसी सौहार्द्य बनी रहे। आयोजन समिति के सदस्यों में किसी एक धर्म समुदाय का योगदान नहीं अपितु हिन्दू मुस्लिम एकता की मिशाल पेश करने पूजा की तैयारियों से लेकर आयोजन की व्यवस्थाओं तक सक्रिय भूमिका निभाते हैं। पंडाल की सजावट में मुस्लिम कारीगरों का भी योगदान रहता है। यह सहभागिता बताती है कि त्योहार किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होते, बल्कि आपसी सहयोग से उनकी खुशियां और बढ़ जाती हैं।
स्थापना से विसर्जन तक निभाते हैं परंपरा –
सलीम नियारिया ने मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना के साथ पूजा की परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इतना ही नहीं, नवरात्रि के नौवें दिन नवमी पर प्रतिमा विसर्जन से पहले निकलने वाली शोभायात्रा की शुरुआत कराने की परंपरा भी उन्होंने शुरू की। दुर्गा पूजा के दौरान आरती में उनकी सहभागिता इसी धार्मिक आस्था और साझा सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।
शहर में भाईचारे की मजबूत मिसाल-
हंडी चौक में धार्मिक सद्भाव की यह परंपरा केवल दुर्गा पूजा तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में हनुमान मंदिर भी स्थापित है। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में उत्साह के साथ भाग लेते हैं। आपसी सहयोग और सम्मान के इसी माहौल ने इस इलाके को सामाजिक एकता की पहचान दी है जो शहर में आपसी भाईचारे की एक मजबूत मिसाल प्रस्तुत करती है।
