रायगढ़। विवाह से पहले कुंडली मिलान की परंपरा के साथ अब वर-वधू की सिकल सेल जांच और जेनेटिक कार्ड का मिलान करने पर भी जोर दिया जा रहा है। सिकल सेल रोग की रोकथाम और समाज में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रायगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष पहल शुरू की है। इसी कड़ी में जिला पंचायत सभाकक्ष में पंडितों एवं पुरोहितों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विवाह योग्य युवक-युवतियों की सिकल सेल जांच कराने और रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सकीय परामर्श लेने के महत्व की जानकारी दी गई।
विवाह से पहले सिकल सेल जांच कराने पर जोर
कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिजीत बबन पठारे की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में समाज के पंडितों एवं पुरोहितों को सिकल सेल रोग के संबंध में जागरूक किया गया।
सीईओ जिला पंचायत श्री पठारे ने कहा कि विवाह से पहले वर-वधू को सिकल सेल की जांच अवश्य करानी चाहिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेना भी जरूरी है। इससे भावी दंपती को संतान में सिकल सेल रोग होने की संभावनाओं को समझने और जागरूकता के साथ निर्णय लेने में मदद मिलती है।
माता-पिता से बच्चों में स्थानांतरित हो सकता है रोग
सीएमएचओ डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारी है, जो माता-पिता से संतान में स्थानांतरित हो सकती है। यह संक्रामक बीमारी नहीं है और किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं फैलती।
उन्होंने बताया कि समय पर पहचान, उचित चिकित्सकीय परामर्श और नियमित उपचार से इस बीमारी से प्रभावित व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है। इसलिए विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए जांच और जेनेटिक स्थिति की जानकारी रखना महत्वपूर्ण है।
पंडितों और पुरोहितों से जागरूकता फैलाने की अपील
सीएमएचओ ने पंडितों एवं पुरोहितों से अपील की कि वे विवाह संबंधी परामर्श के दौरान वर-वधू और उनके परिवारों को सिकल सेल जांच के लिए प्रेरित करें। साथ ही रोग और इसकी वाहक स्थिति को लेकर समाज में प्रचलित गलत धारणाओं को दूर करने में सहयोग करें।
कार्यक्रम में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि जेनेटिक कार्ड की जानकारी पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ रखी जाए। किसी भी प्रकार की शंका होने पर संबंधित व्यक्ति को स्वास्थ्य केंद्र या काउंसलर से परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया जाए। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि सिकल सेल की स्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव या सामाजिक कलंक जैसी स्थिति नहीं बननी चाहिए।
पंडितों और पुरोहितों ने पहल को सराहा
कार्यक्रम में उपस्थित पंडितों एवं पुरोहितों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने आश्वासन दिया कि विवाह के समय कुंडली मिलान के साथ सिकल सेल जांच और जेनेटिक कार्ड मिलान के महत्व के प्रति वर-वधू तथा उनके परिवारों को जागरूक करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सीईओ जिला पंचायत श्री अभिजीत बबन पठारे एवं सीएमएचओ डॉ. अनिल कुमार जगत ने सभी पंडितों और पुरोहितों को शॉल भेंटकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुमित कुमार, शैलेन्द्र मंडल, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. जावेद मारीकर, बायोमेडिकल इंजीनियर नीतिराज सिंह, अतीश तिग्गा, पंकज मिश्रा, जया मजुमदार एवं अनिल साहा सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का उद्देश्य विवाह से पहले सिकल सेल की स्थिति की जानकारी को सामान्य सामाजिक जागरूकता का हिस्सा बनाना है, ताकि समय रहते जांच, चिकित्सकीय परामर्श और सही जानकारी के जरिए आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की दिशा में बेहतर कदम उठाए जा सकें।
