गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM)। जिले के मटियाडांड क्षेत्र में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर रेत के भंडारण और परिवहन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में निजी स्थानों और खुले मैदानी इलाकों में रेत के बड़े-बड़े ढेर लगाए गए हैं। इस मामले ने खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कई स्थानों पर रेत के बड़े ढेर होने का दावा
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मटियाडांड क्षेत्र में एक-दो नहीं, बल्कि कई स्थानों पर रेत का भंडारण किया गया है। आरोप है कि नदियों और नालों से रेत लाकर ट्रैक्टरों के माध्यम से इन स्थानों पर जमा की जाती है।
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। रेत का भंडारण वैध अनुमति के तहत किया जा रहा है या नहीं, यह संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
रात में भारी वाहनों की आवाजाही पर भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रेत के ढेर से रात के समय भारी वाहनों के जरिए परिवहन किया जाता है। मौके पर वाहनों की आवाजाही के निशान होने का भी दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
पर्यावरण और राजस्व को लेकर चिंता
यदि बिना अनुमति रेत का उत्खनन या भंडारण पाया जाता है, तो इससे शासन को राजस्व नुकसान के साथ पर्यावरणीय प्रभाव का मामला भी सामने आ सकता है। स्थानीय लोगों ने नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगाने की मांग की है।
खनिज विभाग की कार्रवाई पर टिकी नजर
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्षेत्र में मौजूद रेत के भंडार वैध हैं या नहीं। संबंधित स्थानों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और रेत के स्रोत की पड़ताल से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है। अब देखना होगा कि शिकायत और सामने आए आरोपों के बाद खनिज विभाग तथा प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।




