झूठे शपथ पत्र और सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप: दस्तावेजों के साथ जनपद उपाध्यक्ष की सदस्यता समाप्त करने की मांग

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भाजपा समर्थित जनपद उपाध्यक्ष के खिलाफ कलेक्टर को सौंपा गया शिकायत पत्र, आने वाले दिनों में तेज हो सकते हैं राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

सूरजपुर @कौशलेन्द्र यादव। जिले की राजनीति में एक नया विवाद उस समय सामने आ गया जब जनपद पंचायत सूरजपुर के उपाध्यक्ष एवं क्षेत्र क्रमांक-21 से निर्वाचित भाजपा समर्थित जनपद सदस्य मनमथ कुमार बछाड़ के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर को दस्तावेजों सहित शिकायत पत्र सौंपा गया। उक्त शिकायत छत्तीसगढ़ असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के प्रदेश महासचिव तपन सिकदार ने आरोप लगाया है कि जनप्रतिनिधि द्वारा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किए जाने और चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को शपथ पत्र में छिपाए जाने के बावजूद निर्वाचन प्रक्रिया में भाग लिया गया।शिकायत पत्र के साथ राजस्व न्यायालय के आदेश, पंचनामा, शपथपूर्वक दिए गए कथित बयान सहित अन्य अभिलेख भी संलग्न किए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि ये दस्तावेज उनके आरोपों की पुष्टि करते हैं और मामले की निष्पक्ष जांच होने पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।शिकायत में उल्लेख किया गया है कि तहसीलदार न्यायालय लटोरी द्वारा वर्ष 2021 में पारित आदेश में खसरा नंबर-97 की शासकीय भूमि पर मकान एवं बाड़ी बनाकर अतिक्रमण किए जाने का उल्लेख है। वहीं 5 मार्च 2021 को तैयार पंचनामा तथा 14 जुलाई 2021 को तहसीलदार के समक्ष दिए गए कथित शपथपूर्वक बयान का भी हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन तथ्यों के बावजूद चुनावी शपथ पत्र में संबंधित जानकारी का खुलासा नहीं किया गया।तपन सिकदार ने कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक से मामले की विस्तृत जांच कर छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने जनपद सदस्यता समाप्त करने और भविष्य में चुनाव लड़ने की पात्रता पर भी विचार किए जाने की मांग उठाई है। शिकायत की प्रतिलिपि राज्य निर्वाचन आयोग, जिला पंचायत, एसडीएम कार्यालय तथा अन्य संबंधित विभागों को भी भेजी गई है।

फिर तेज होगी सियासी गतिविधियां

शिकायत ऐसे समय सामने आई है जब जिले की राजनीति लगातार नए समीकरणों और मुद्दों के बीच गुजर रही है। चूंकि संबंधित जनपद उपाध्यक्ष भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए इस घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। स्थानीय
जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में यह मामला केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा विषय बन सकता है। वहीं दूसरी तरफ उक्त शिकायत की जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल होते ही गांव की चौपालों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस शिकायत की चर्चा शुरू हो चुकी है। समर्थक इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि विरोधी पक्ष इसे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है।

सभी की निगाहें जांच पर

लोकतंत्र में जनता का विश्वास ही किसी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी ताकत होता है। ऐसे में जब किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि पर दस्तावेजों के आधार पर सवाल खड़े किए जाते हैं, तो स्वाभाविक रूप से लोगों की उत्सुकता और अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं। अब जिले की जनता की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है। हर कोई जानना चाहता है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और जांच के बाद प्रशासन क्या निर्णय लेता है।फिलहाल यह मामला शिकायत और दस्तावेजों के आधार पर उठाए गए आरोपों का है। आरोपों की सत्यता और कानूनी स्थिति का अंतिम निर्णय सक्षम प्रशासनिक एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन इतना तय है कि इस शिकायत ने जिले की राजनीतिक फिजा में हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहने वाला है।

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