पसान में जंगल कटाई का आरोप, सढ़ामार बांध के पास 50 से ज्यादा पेड़ काटे जाने की शिकायत

ग्रामीणों का दावा- मौके पर दो लोग पेड़ काटते मिले, राय सिंह के कहने पर कटाई करने की बात बताई; वन विभाग ने पंचनामा बनाया, कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी

पसान। कटघोरा वनमंडल के पसान वन परिक्षेत्र में जंगल की अवैध कटाई को लेकर ग्रामीणों ने वन विभाग से शिकायत की है। ग्रामीणों का आरोप है कि लैंगा सर्किल के चंद्रौटी बीट अंतर्गत सढ़ामार बांध के आसपास बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई है। मामले को लेकर ग्राम कर्री-सढ़ामार के ग्रामीणों ने पसान वन परिक्षेत्र अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।

50 से 60 पेड़ कटे मिलने का दावा

ग्रामीणों के मुताबिक, जंगल में लगातार पेड़ों की कटाई की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने स्वयं निगरानी शुरू की थी। 19 सितंबर को सढ़ामार बांध की ओर से मशीन चलने जैसी आवाज सुनाई देने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे। वहां कथित तौर पर करीब 50 से 60 पेड़ कटे हुए मिले।

ग्रामीणों का कहना है कि इनमें कई पेड़ काफी पुराने थे। मौके पर दो लोगों के पेड़ काटने की बात भी सामने आई। ग्रामीणों के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों ने कथित तौर पर राय सिंह के कहने पर मजदूरी में पेड़ काटने की जानकारी दी। इसी दौरान वन विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद दोनों मौके से चले गए।

मौके पर लकड़ी का ढेर होने का दावा

ग्रामीणों ने बताया कि घटनास्थल पर बड़ी मात्रा में कटी हुई लकड़ी मौजूद थी। उनके अनुसार, वहां दो से अधिक ट्रकों में भरने लायक लकड़ी पड़ी हुई थी। ग्रामीणों ने पेड़ों की प्रजाति में सलेहा और गुंजा समेत अन्य पेड़ों के कटने का भी दावा किया है।

21 सितंबर को पहुंची वन विभाग की टीम

शिकायत के मुताबिक, ग्रामीणों की सूचना के बाद 21 सितंबर को वन विभाग के बीट गार्ड और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि पंचनामा तैयार होने के बाद अब तक मामले में आगे की कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

ग्रामवासियों ने अपने आवेदन में सढ़ामार निवासी राय सिंह और उसके कथित साथियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से पेड़ों की कटाई की जा रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग की जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही कटाई की वास्तविक स्थिति तथा जिम्मेदार लोगों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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