पुलिस कार्यालय में सेवा सम्मान समारोह अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल को किया गया सम्मानित
रायगढ़। पुलिस विभाग में 39 वर्षों की लंबी, निष्कलंक और समर्पित सेवा देने के बाद सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार 31 मार्च को अधिवर्षिकी आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर पुलिस कार्यालय में विभागीय परंपरा के तहत सेवा सम्मान समारोह आयोजित कर उन्हें ससम्मान विदाई दी गई।
कार्यक्रम में रक्षित निरीक्षक अमित सिंह ने उनके सेवाकाल का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि श्री सिदार ने वर्ष 1987 में आरक्षक के रूप में अपनी सेवा यात्रा शुरू की थी और अपने अनुशासन व कार्यनिष्ठा से विभाग में अलग पहचान बनाई।

विभिन्न थानों में दी उत्कृष्ट सेवाएं पदोन्नति के साथ बढ़ती गई जिम्मेदारियां
अपने लंबे सेवाकाल में उन्होंने सिटी कोतवाली, घरघोड़ा, पूंजीपथरा, तमनार और अविभाजित जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के थाना सारंगढ़ में सेवाएं दीं। वर्ष 2012 में प्रधान आरक्षक और वर्ष 2021 में सहायक उप निरीक्षक के पद पर पदोन्नत हुए।
पदोन्नति के बाद उन्हें जांजगीर-चांपा में पदस्थ किया गया, जहां सेवाएं देने के पश्चात वे पुनः रायगढ़ लौटे और हाल ही में रक्षित केंद्र में कार्यरत थे।

परिवार और शिक्षा में भी मजबूत आधार बेटियों ने हासिल की मेडिकल डिग्री
मूलतः धरमजयगढ़ तहसील के ग्राम नवागांव निवासी श्री जयराम सिदार वर्तमान में चक्रधरनगर क्षेत्र में अपने परिवार के साथ निवासरत हैं। उनके परिवार में पत्नी, दो पुत्र, दो पुत्रियां और बहु शामिल हैं। उनका एक पुत्र शिक्षक है, दोनों पुत्रियां एमबीबीएस की पढ़ाई पूर्ण कर चुकी हैं, जबकि छोटा पुत्र अध्ययनरत है।
एसएसपी का संदेश सेवानिवृत्ति अनुशासन और परिवार के सहयोग का परिणाम
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि किसी भी पुलिसकर्मी की लंबी और सफल सेवा उसके अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और परिवार के सहयोग का परिणाम होती है। उन्होंने श्री सिदार को स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए आश्वस्त किया कि वे हमेशा पुलिस परिवार का हिस्सा बने रहेंगे।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने पुष्पमाला पहनाकर किया सम्मान भावुक माहौल में दी गई विदाई
कार्यक्रम में डीएसपी उन्नति ठाकुर, मुख्य लिपिक त्रिलोचन मालाकार, निरीक्षक जमुना प्रसाद चेलकर सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारियों ने श्री जयराम सिदार को पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान उनके परिवारजन भी मौजूद रहे, जिससे कार्यक्रम भावनात्मक और गरिमामय बन गया।
