ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत कापू पुलिस की कार्रवाई, तमिलनाडु के बाद कोरबा में बदलता रहा ठिकाना; पुलिस ने दबोचा
रायगढ़, 1 अक्टूबर 2026। जिले में भूमि संबंधी अपराध और फर्जीवाड़े के मामलों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत कापू पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार पण्डो जनजाति की भूमि को कथित रूप से फर्जी दस्तावेज और पहचान का इस्तेमाल कर गैर-आदिवासी के नाम विक्रय कराने के मामले में फरार चल रहे सुखन राठिया (50), निवासी बकालो, थाना कापू को कोरबा से पकड़ा गया।
पुलिस ने आरोपी को रायगढ़ लाकर पूछताछ की। विवेचना में उसकी कथित संलिप्तता सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया है।

फरारी से बचने तमिलनाडु और कोरबा में बदला ठिकाना
पुलिस के मुताबिक मामले में तत्कालीन पटवारी राकेश कुमार साय और रजिस्ट्री के गवाह अगस्तुस खलखो की गिरफ्तारी के बाद अन्य आरोपियों की तलाश तेज की गई थी। इसी दौरान सुखन राठिया गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले तमिलनाडु चला गया।
पुलिस की तलाश की जानकारी मिलने के बाद उसने कोरबा में अपना ठिकाना बना लिया था। सूचना मिलने पर कापू पुलिस की टीम ने कोरबा में दबिश देकर उसे हिरासत में लिया।
क्या है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार ग्राम डुमरनारा स्थित खसरा नंबर 409 की भूमि पहले राजस्व अभिलेखों में पण्डो जनजाति के सदस्यों के नाम दर्ज थी। वर्ष 2023-24 के राजस्व अभिलेखों की जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि सक्षम अधिकारी के आदेश के बिना भूमि को सुखन पिता बजरंग, जाति रावत के नाम दर्ज किया गया।
इसके बाद 21 फरवरी 2024 को इसी भूमि का पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से रायपुर निवासी संतोष देवी गुप्ता के नाम विक्रय किया गया।
जांच के दौरान पुलिस के अनुसार विक्रेता के तौर पर प्रस्तुत व्यक्ति की वास्तविक पहचान सुखन राठिया पिता धनाराम, जाति कंवर के रूप में सामने आई। दस्तावेजों के सत्यापन में कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड के इस्तेमाल की बात भी सामने आई।
पटवारी समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच
पुलिस के अनुसार तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय की भूमिका भी जांच में सामने आई है। आरोप है कि भूमि के विक्रय के लिए आवश्यक चौहद्दी उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका रही।
तहसीलदार कापू उन्मेश पटेल की रिपोर्ट पर 7 जुलाई 2026 को थाना कापू में अपराध क्रमांक 108/2026 दर्ज किया गया। प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 419, 420, 467, 468, 471 और 120(बी) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई।
विवेचना के दौरान विक्रेता सुखन राठिया, क्रेता संतोष देवी गुप्ता, साक्षी संतन राठिया एवं जीवन वर्धन तथा तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय की भूमिका की जांच की गई।
पूछताछ में 10 हजार रुपये मिलने की बात कही
पुलिस के अनुसार पूछताछ में सुखन राठिया ने अपना वास्तविक नाम सुखन राठिया पिता धनाराम राठिया बताया। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि तत्कालीन पटवारी राकेश साय और अन्य लोगों ने उसका नाम सुखन पिता बजरंग रावत दर्शाकर भूमि की रजिस्ट्री कराई थी।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने यह भी बताया कि रजिस्ट्री के एवज में उसे 10 हजार रुपये दिए गए थे। इसके बाद भूमि को गैर-आदिवासी के नाम विक्रय किया गया।
पुलिस टीम की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार विवेचना में पण्डो जनजाति की भूमि की कथित विधि-विरुद्ध खरीदी-बिक्री में आरोपी की भूमिका पाए जाने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उसे रिमांड पर भेज दिया गया है। मामले में अन्य संबंधित आरोपों और व्यक्तियों की भूमिका की विवेचना जारी है।
यह कार्रवाई एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन, एएसपी अनिल सोनी के मार्गदर्शन और एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के सुपरविजन में की गई। आरोपी की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी कापू निरीक्षक धर्माराम तिर्की, प्रधान आरक्षक सोमेश गोस्वामी, लक्ष्मी कैवर्त, आरक्षक विभूति सिंह, कन्हैया भगत सहित पुलिस स्टाफ की भूमिका रही।
