“धान उत्पादन में क्रांतिकारी कदम: IGKV-BARC की 6 नई उन्नत किस्में किसानों को सौंपीं”

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रायपुर | कृषि नवाचार से बढ़ेगी किसानों की आमदनी

छत्तीसगढ़ की खेती में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में Indira Gandhi Krishi Vishwavidyalaya ने एक अहम पहल की है। विश्वविद्यालय ने Bhabha Atomic Research Centre (BARC) के सहयोग से विकसित धान की 6 उन्नत म्यूटेंट किस्मों का वितरण प्रगतिशील किसानों को किया। यह कार्यक्रम कृषि महाविद्यालय रायपुर में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।

🌾 कम समय, ज्यादा पैदावार—नई किस्मों की खासियत

वितरित की गई ये नई किस्में पारंपरिक धान के मुकाबले कई मायनों में बेहतर बताई जा रही हैं।
इनकी प्रमुख विशेषताएं—

  • कम अवधि में पकने वाली
  • अधिक उत्पादन देने वाली
  • कम ऊंचाई (गिरने का खतरा कम)
  • कीट एवं रोगों के प्रति अधिक सहनशील

किसानों को मिनी किट के रूप में विक्रम TCR, विष्णुभोग म्यूटेंट, सोनागाथी म्यूटेंट, दुबराज म्यूटेंट-1, बौना लुचाई और जवाफूल म्यूटेंट जैसी किस्में उपलब्ध कराई गईं।

🏛️ सरकार का फोकस—पुरानी किस्मों की जगह नई तकनीक

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कृषि उत्पादन आयुक्त Shahla Nigar ने कहा कि “छत्तीसगढ़ का असली सोना उसका धान है।”
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार खरीफ 2026 में 40% पुरानी किस्मों को नई उन्नत किस्मों से बदलने की योजना पर काम कर रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।

🔬 रेडिएशन तकनीक से विकसित फसलें

कुलपति Dr Girish Chandel ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से म्यूटेशन ब्रीडिंग के जरिए फसल सुधार का काम चल रहा है। इस तकनीक में रेडिएशन के माध्यम से फसलों के अवांछित गुण हटाकर बेहतर गुण विकसित किए जाते हैं—जैसे ज्यादा उपज, सूखा सहनशीलता और पोषण क्षमता।

🌱 कृषि में विज्ञान का बढ़ता दखल

BARC के वैज्ञानिकों ने भी किसानों को नाभिकीय तकनीक के उपयोग और इसके फायदे समझाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वैज्ञानिक पहल से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धान किस्मों को संरक्षित करते हुए उनकी गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार संभव है।

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