बस्तर में विकास और विश्वास की नई इबारत: सुरक्षा कैंप बन रहे जनसेवा केंद्र, 70 कैंपों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की तैयारी

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नक्सल प्रभावित गांवों में डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा; पहले चरण में 70 सुरक्षा कैंपों को सेवा डेरा बनाने की योजना

बस्तर। कभी नक्सल हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बुनियादी सुविधाओं से दूर रहे बस्तर के गांवों में अब विकास और जनविश्वास को मजबूत करने की दिशा में पहल की जा रही है। जिन इलाकों में कभी भय और असुरक्षा का माहौल रहता था, वहां स्थापित सुरक्षा कैंप अब जनसुविधाओं और विकास गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लगभग 200 सुरक्षा कैंपों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। पहले चरण में 70 कैंपों को इस स्वरूप में बदलने की तैयारी है।

इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ गांवों के लोगों को स्थानीय स्तर पर डिजिटल सेवाएं, बैंकिंग सुविधाएं, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूरदराज के शहरों और कस्बों तक न जाना पड़े।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा बस्तर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप बस्तर को नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त कर विकसित जनजातीय क्षेत्र के रूप में आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से सुदूर अंचलों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही कृषि, पशुपालन और सिंचाई से जुड़ी योजनाओं के जरिए ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

सुरक्षा कैंपों से ग्रामीणों को मिलेंगी सुविधाएं

शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा की परिकल्पना सुरक्षा कैंपों को जनसुविधा केंद्रों के रूप में विकसित करने से जुड़ी है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं और बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाने के साथ कौशल विकास तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की योजना है।

दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से ग्रामीणों को समय और संसाधनों की बचत होने की उम्मीद है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर विकसित होने से गांवों की आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

नेतानार से हुई थी पहल की शुरुआत

18 मई 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बस्तर जिले के नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में देश के पहले शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया था। अब इसी पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की योजना है।

नेतानार का ऐतिहासिक महत्व भी इस पहल को विशेष बनाता है। इसे बस्तर के महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर की जन्मस्थली माना जाता है। वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह में गुंडाधुर ने आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया था।

जनसेवा और स्वावलंबन को मिलेगा नया आधार

शहीद वीर गुंडाधुर के नाम पर स्थापित सेवा डेरा को आदिवासी समाज के स्वाभिमान, स्वावलंबन और आधुनिक विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। योजना के तहत सुरक्षा कैंपों को जनसुविधा केंद्रों में बदलने से प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संपर्क बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा।

बस्तर के दूरस्थ इलाकों में विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाना, स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाना और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना इस पहल की सफलता के प्रमुख आधार होंगे। यदि निर्धारित योजना के अनुरूप इन केंद्रों पर सुविधाएं प्रभावी ढंग से उपलब्ध होती हैं, तो ये ग्रामीणों के दैनिक जीवन को आसान बनाने और क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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