डॉ. मनीषा त्रिपाठी का शोध आलेख देश के 21 सर्वश्रेष्ठ आलेखों में चयनित, डॉ. माधुरी त्रिपाठी की ओजस्वी साहित्यिक प्रस्तुति ने भी विद्वतजनों का ध्यान आकृष्ट किया; दोनों विदुषियों की उपलब्धि से छत्तीसगढ़ गौरवान्वित।
रायगढ़। प्रतिभा जब ज्ञान-साधना, सतत परिश्रम और अटूट संकल्प के साथ आगे बढ़ती है, तो उसकी उपलब्धियां व्यक्तिगत सफलता की सीमाओं को लांघकर पूरे क्षेत्र और प्रदेश का गौरव बन जाती हैं। रायगढ़ की दो प्रतिभासंपन्न विदुषी बहनों डॉ. माधुरी त्रिपाठी एवं डॉ. मनीषा त्रिपाठी ने नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन-2026 में सम्मानित होकर इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है। विशेष उपलब्धि यह रही कि डॉ. मनीषा त्रिपाठी का शोध आलेख देशभर से प्राप्त 139 आलेखों में चयनित 21 सर्वश्रेष्ठ आलेखों में शामिल हुआ। वहीं डॉ. माधुरी त्रिपाठी ने अपनी ओजस्वी काव्याभिव्यक्ति एवं प्रभावशाली शोध प्रस्तुति से विद्वतजनों की सराहना प्राप्त की।

विज्ञान भवन में हुआ हिंदी के वैश्विक स्वरूप और भविष्य पर मंथन
विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में 30 एवं 31 अक्टूबर 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया। ‘भारत रत्न अटल : हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन’ विषय पर केंद्रित इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, शिक्षाविदों, भाषाविदों, राजनेताओं एवं हिंदीसेवियों ने सहभागिता की।
सम्मेलन की अध्यक्षता पद्मभूषण आचार्य यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद ने की। आयोजन के सफल संचालन एवं राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय में विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उद्घाटन सत्र में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू, केंद्रीय विदेश एवं वस्त्र राज्य मंत्री श्री पवित्रा मार्गेरिटा, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सदस्य-सचिव प्रोफेसर सच्चिदानंद मिश्रा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री अनिल ठाकुर तथा संस्कृति मंत्रालय से जुड़े श्री दीपक ठाकुर सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में हिंदी की वर्तमान स्थिति, वैश्विक पटल पर उसकी स्वीकार्यता, भारतीय भाषाओं के मध्य पारस्परिक समन्वय तथा तकनीकी नवाचार के माध्यम से हिंदी के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। फिजी के राजदूत श्री जगन्नाथ सिमी, इंडोनेशिया से श्रीमती इंदु नांदल, जम्मू-कश्मीर के चुनाव आयुक्त श्री शांतमनु, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के पौत्र श्री अरविंद कुमार सिंह तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री रवि अय्यर सहित अनेक विशिष्ट व्यक्तित्वों की सहभागिता ने आयोजन को अंतरराष्ट्रीय गरिमा प्रदान की।

डॉ. मनीषा त्रिपाठी के शोध आलेख ने बनाई विशिष्ट पहचान
सम्मेलन के प्रथम दिवस शोध आलेख वाचन एवं काव्य-पाठ का सत्र आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. माधुरी त्रिपाठी एवं डॉ. मनीषा त्रिपाठी ने अपनी बौद्धिक प्रतिभा और साहित्यिक अभिव्यक्ति का परिचय दिया।
इस सत्र की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही कि रायगढ़, छत्तीसगढ़ की डॉ. मनीषा त्रिपाठी का शोध आलेख 139 प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत आलेखों में से चयनित 21 सर्वश्रेष्ठ आलेखों में सम्मिलित किया गया। राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित चयन ने रायगढ़ की शैक्षणिक एवं साहित्यिक प्रतिभा को विशिष्ट पहचान दिलाई। उनके शोध की विषयवस्तु, वैचारिक गहराई और प्रस्तुतीकरण की विद्वतजनों तथा गणमान्य अतिथियों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। समापन सत्र में भी उनके आलेख का विशेष उल्लेख करते हुए मंचासीन अतिथियों ने सराहना की। इस दौरान सभागार करतल ध्वनि से गूंज उठा।
ओजस्वी काव्याभिव्यक्ति से डॉ. माधुरी त्रिपाठी ने अटल जी को दी भावांजलि
डॉ. माधुरी त्रिपाठी ने ‘वैश्वीकरण के दौर में अटल का राष्ट्रवाद : एक विश्लेषण’ विषय पर अपना शोध आलेख प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के राष्ट्रवादी विचारों और व्यक्तित्व को अपनी ओजस्वी काव्याभिव्यक्ति के माध्यम से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी विशिष्ट भाषा-शैली, सारगर्भित विचारों और प्रभावशाली वाचन ने उपस्थित श्रोताओं का ध्यान आकृष्ट किया। प्रस्तुति में साहित्यिक संवेदना के साथ वैचारिक गंभीरता का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसकी उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने सराहना की।
गरिमामय समारोह में प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न से सम्मान
सम्मेलन के द्वितीय दिवस आयोजित समापन एवं सम्मान समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री रवि अय्यर ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ राजनेता एवं पूर्व सांसद श्री के.सी. त्यागी, श्री अनिल ठाकुर, डॉ. रश्मि सलूजा, डॉ. संजय पासवान, डॉ. मृदुल कीर्ति, जापान से डॉ. दुर्गा सिन्हा, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा एवं श्रीमती रामा भारद्वाज, कतर से श्रीमती सुनीता शर्मा, लंदन से श्रीमती वंदना खुराना, मॉरीशस से श्रीमती कल्पना लाल, बहरीन से श्रीमती ममता तिवारी, थाईलैंड से श्री सुनील सेतपौड़, नीदरलैंड से श्रीमती रामा तक्षक तथा श्रीलंका से सुश्री अतिला कोतलावत सहित विभिन्न देशों के हिंदीसेवियों की उपस्थिति रही।
सम्मान सत्र में विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार, बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य एवं भारत सरकार के पूर्व मंत्री श्री संजय पासवान, आईएएस श्री अशोक कुमार भार्गव, महाराष्ट्र हिंदी परिषद के प्राध्यापक डॉ. अर्जुन चव्हाण तथा भारतीय दूतावास, कोलंबो से जुड़ी सुश्री अतिला कोतलावत की गरिमामयी उपस्थिति में डॉ. माधुरी त्रिपाठी एवं डॉ. मनीषा त्रिपाठी को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने दोनों विदुषियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उपलब्धियों से समृद्ध है दोनों बहनों का शैक्षणिक एवं साहित्यिक सफर
डॉ. माधुरी त्रिपाठी की प्रतिभा और योगदान को पूर्व में मॉरीशस गणराज्य के राष्ट्रपति पुरस्कार एवं राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं डॉ. मनीषा त्रिपाठी राज्यपाल पुरस्कार तथा शिक्षा दूत अलंकरण से सम्मानित हो चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में प्राप्त यह सम्मान दोनों बहनों की ज्ञान-साधना, साहित्यिक अभिरुचि और शैक्षणिक समर्पण की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस गौरवपूर्ण सहभागिता के पीछे छत्तीसगढ़ विश्व हिंदी परिषद की अध्यक्ष डॉ. संगीता सिंह बनाफर का मार्गदर्शन एवं प्रेरणा भी महत्वपूर्ण रही। उन्हीं के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की प्रतिनिधि विदुषियों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस मंच पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। दोनों बहनों ने अपनी सफलता के लिए डॉ. संगीता सिंह बनाफर के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।
वर्तमान में डॉ. मनीषा त्रिपाठी शासकीय रविशंकर प्राथमिक शाला, चांदमारी, रायगढ़ में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत हैं। अध्यापन के दायित्वों के साथ शोध, साहित्य एवं बौद्धिक गतिविधियों में उनकी सक्रियता शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी है।
रायगढ़ में हर्ष का वातावरण, शुभचिंतकों ने दी बधाई
विज्ञान भवन में मिली इस प्रतिष्ठित उपलब्धि से रायगढ़ जिले में हर्ष का वातावरण है। जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, शिक्षाविदों, सहकर्मियों, मित्रों, स्नेहीजनों एवं शुभचिंतकों ने दोनों विदुषियों को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
डॉ. माधुरी त्रिपाठी एवं डॉ. मनीषा त्रिपाठी ने इस उपलब्धि में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी शुभचिंतकों, मार्गदर्शकों और मीडिया जगत के साथियों के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की है।
निस्संदेह, रायगढ़ की इन दोनों विदुषी बहनों की उपलब्धि केवल दो व्यक्तित्वों का सम्मान नहीं, बल्कि जिले की साहित्यिक, शैक्षणिक और बौद्धिक क्षमता का राष्ट्रीय मंच पर स्थापित परिचय है। उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी को अध्ययन, अनुसंधान, सृजन और हिंदी भाषा की सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करती रहेगी।


