स्मृति ईरानी पर जयमाला सिंह का तीखा हमला, बोलीं—छत्तीसगढ़ में सियासी रौब नहीं, जनहित की जवाबदेही चाहिए

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रायगढ़। छत्तीसगढ़ में भाजपा संगठन और नेताओं को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा की छत्तीसगढ़ प्रभारी स्मृति ईरानी के तेवर पर कांग्रेस नेत्री जयमाला सिंह ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में राजनीतिक रौब दिखाने के बजाय जनहित के प्रति जवाबदेही और सुशासन पर ध्यान देने की जरूरत है।

जयमाला सिंह ने आरोप लगाया कि स्मृति ईरानी छत्तीसगढ़ में भाजपा नेताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाने और विपक्ष को चुनौती देने के अंदाज में पेश आ रही हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भाजपा की जागीर नहीं है और यहां की जनता किसी की राजनीतिक जागीरदार नहीं है।

“दीदी कहलाने का सम्मान व्यवहार से मिलता है”

कांग्रेस नेत्री ने कहा कि केवल अपने लिए दीदी या बहनजी जैसे संबोधनों का इस्तेमाल करने से कोई जनता का हितैषी नहीं बन जाता। उनके मुताबिक, सम्मान रिश्तों और व्यवहार से मिलता है, रौब दिखाने से नहीं।

जयमाला सिंह ने महिला सम्मान के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वाले नेताओं के बयानों और महिलाओं से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर उनके कामकाज का आकलन भी होना चाहिए।

भाजपा संगठन की मजबूती पर उठाए सवाल

जयमाला सिंह ने सवाल किया कि यदि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार और संगठन मजबूत हैं, तो बाहर से आकर नेताओं को कठोर लहजे में समझाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? उन्होंने सरकार और संगठन के बीच समन्वय तथा पार्टी के भीतर संभावित असंतोष को लेकर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि राजनीति में ऊंची आवाज नेतृत्व का प्रमाण नहीं होती और विपक्ष को ललकारना कोई उपलब्धि नहीं है। उनके अनुसार, वास्तविक नेतृत्व वही है जो जनता की समस्याएं सुने, अपने नेताओं को जवाबदेह बनाए और किए गए वादों को जमीन पर उतारे।

“बंद कमरों की बैठकों से जनता की राय तय नहीं होती”

कांग्रेस नेत्री ने भाजपा नेताओं को आगाह करते हुए कहा कि सत्ता के प्रभाव में जनता की ताकत को कम आंकने की भूल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बंद कमरों में बैठकें करके कार्यकर्ताओं को संदेश दिया जा सकता है, लेकिन जनता के मन में क्या चल रहा है, इसका फैसला कोई प्रभारी नहीं कर सकता।

जयमाला सिंह ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ की जागरूक जनता राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रख रही है और समय आने पर अपना जवाब भी देती है।

सरकार के कामकाज का हिसाब देने की मांग

जयमाला सिंह ने स्मृति ईरानी से विपक्ष को नसीहत देने के बजाय राज्य सरकार के कामकाज पर ध्यान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता को राजनीतिक दबदबे के बजाय जवाबदेही और सुशासन चाहिए।

उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा कि सत्ता की ताकत अस्थायी होती है, जबकि जनता की ताकत स्थायी है। कांग्रेस नेत्री के इस बयान से प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और धार मिली है।

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