27 अक्टूबर से पहले अनुमति खारिज करने के कारण स्पष्ट करने का निर्देश, जवाब नहीं मिलने पर मामले को गंभीरता से लेगा न्यायालय
वाराणसी, 17 अक्टूबर 2026। वाराणसी के शास्त्री घाट पर 20 सितंबर 2026 को आयोजित नई पीढ़ी संवाद कार्यक्रम की अनुमति पुलिस प्रशासन द्वारा नहीं दिए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान (रोसा) की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने पुलिस कमिश्नर, वाराणसी से शपथपत्र के माध्यम से जवाब मांगा है। न्यायालय ने अगली सुनवाई की निर्धारित तिथि 27 अक्टूबर से पहले कार्यक्रम की अनुमति नहीं देने के कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि ऐसा करने में विफल रहने पर न्यायालय मामले को गंभीरता से लेने के लिए बाध्य होगा।

पुलिस से अनुमति अस्वीकार करने के कारण बताने को कहा
रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान के राजेश सचान की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के स्थायी अधिवक्ता को भी इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा कि 20 सितंबर 2026 को प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति किन कारणों से अस्वीकार की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नितिन मिश्रा और संतोष कुमार सिंह ने पक्ष रखा। मामले की जानकारी रोसा के मीडिया प्रभारी आनंद मिश्रा ने दी।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अधिकारों को लेकर अभियान
आनंद मिश्रा के अनुसार, रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान वाराणसी सहित पूर्वांचल के दस जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के संवैधानिक अधिकारों की गारंटी की मांग को लेकर अभियान चला रहा है। संगठन का कहना है कि सरकार और कॉरपोरेट संपत्तियों पर कर लगाकर इन बुनियादी अधिकारों के लिए संसाधन जुटाए जाने चाहिए। इसी अभियान के तहत 20 सितंबर को वाराणसी में नई पीढ़ी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसकी अनुमति पुलिस प्रशासन ने नहीं दी थी।
नवंबर में दस जिलों के प्रतिनिधियों की दो दिवसीय कार्यशाला
रोसा की ओर से 1 और 2 नवंबर 2026 को वाराणसी में दस जिलों के नई पीढ़ी के प्रतिनिधियों की दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित करने की जानकारी दी गई है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार की राजनीतिक अर्थव्यवस्था, प्राथमिक शिक्षा की चुनौतियों, उच्च शिक्षा के संकट और नई शिक्षा नीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है।
ऋण-जमा अनुपात, महिला समूहों और आदिवासी अधिकारों पर होगी चर्चा
कार्यशाला में प्रदेश के ऋण-जमा अनुपात, बचत के निवेश से जुड़ी चुनौतियों और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों के कथित आर्थिक शोषण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही आदिवासियों के मूल अधिकार एवं पहचान, अति पिछड़ा वर्ग के सामने आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों, वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति, संवैधानिक लोकतंत्र तथा जन आंदोलनों की भूमिका पर भी चर्चा प्रस्तावित है।
— आनंद मिश्रा
मीडिया प्रभारी
रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान (रोसा)


