50 हजार रुपये नकद भुगतान और फाइनेंस राशि को लेकर उठाए सवाल, दस्तावेजों की जांच की मांग
विश्रामपुर/सूरजपुर। विश्रामपुर में नई स्कूटी खरीदने के बाद भुगतान और वाहन की कीमत को लेकर विवाद सामने आया है। बंशीपुर निवासी प्रेम कुमारी ने शोरूम संचालक पर निर्धारित कीमत से अतिरिक्त राशि लेने और भुगतान से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने में कथित तौर पर आनाकानी करने का आरोप लगाया है। महिला ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विश्रामपुर थाने में लिखित शिकायत दी है।
करीब 1.01 लाख रुपये कीमत तय होने का दावा
शिकायतकर्ता प्रेम कुमारी के अनुसार, स्कूटी की कीमत करीब 1 लाख 1 हजार रुपये तय की गई थी। उन्होंने वाहन खरीदने के दौरान 50 हजार रुपये नकद भुगतान किए। महिला का आरोप है कि नकद भुगतान की रसीद को लेकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा और भुगतान से संबंधित दस्तावेज तत्काल उपलब्ध नहीं कराए गए।
फाइनेंस राशि को लेकर भी उठे सवाल
महिला ने फाइनेंस की राशि को लेकर भी पूरी जानकारी नहीं दिए जाने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक फाइनेंसर से 35 हजार रुपये जमा होने की जानकारी मिली। इसके बाद वाहन की कुल कीमत, उनके द्वारा किए गए नकद भुगतान और फाइनेंस की राशि के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े हुए।
महिला का कहना है कि काफी बातचीत के बाद उन्हें वाहन का बिल उपलब्ध कराया गया।
दूसरे शोरूम के कोटेशन से की कीमत की तुलना
शिकायतकर्ता के मुताबिक, दूसरे शोरूम से प्राप्त कोटेशन में इसी मॉडल की स्कूटी की ऑन-रोड कीमत करीब 1 लाख 600 रुपये बताई गई है। इसके बाद उन्होंने अपने वाहन की कीमत और किए गए भुगतान का मिलान करने की मांग की है।
पूर्व शिकायतों के दावे की पुष्टि नहीं
मामले में स्थानीय स्तर पर शोरूम संचालक के खिलाफ पूर्व में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें फिलहाल आरोप या स्थानीय चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है। इनकी वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस से दस्तावेजों की जांच और कार्रवाई की मांग
प्रेम कुमारी ने विश्रामपुर थाने में दिए आवेदन में वाहन की वास्तविक कीमत, 50 हजार रुपये के नकद भुगतान, फाइनेंस राशि और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। महिला ने जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी की है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल मामला पुलिस तक पहुंच चुका है। अब दस्तावेजों और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि वाहन की वास्तविक कीमत क्या थी, नकद और फाइनेंस के माध्यम से कितनी राशि जमा की गई तथा शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।


