खनिज निरीक्षक की अनुपस्थिति का हवाला, विभाग ने 4-5 दिन बाद कार्रवाई की बात कही; सैकड़ों ट्रैक्टर रेत डंप होने के आरोप
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मरवाही तहसील क्षेत्र के मौहरीटोला में कथित बड़े पैमाने पर रेत भंडारण का मामला सामने आने के बाद जिला खनिज विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर रूमगा, सिलपहरी और कोलबीरा क्षेत्र से कथित रूप से रेत उत्खनन कर मौहरीटोला में बड़ी मात्रा में डंप किए जाने की शिकायत सामने आई है।
मामले में कार्रवाई को लेकर जिला खनिज विभाग के माइनिंग डायरेक्टर आदित्य मानकर से जानकारी लिए जाने पर उन्होंने बताया कि फिलहाल खनिज निरीक्षक उपलब्ध नहीं हैं। उनके अनुसार निरीक्षक के करीब चार से पांच दिन बाद लौटने के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षक की अनुपस्थिति में कार्रवाई क्यों नहीं?
विभाग के इस बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि किसी स्थान पर कथित अवैध रेत भंडारण की सूचना विभाग तक पहुंच चुकी है, तो मौके की स्थिति की तत्काल जांच क्यों नहीं की जा रही है।
सवाल यह भी है कि निरीक्षक की अनुपस्थिति में क्या विभाग के पास मौके का निरीक्षण करने या संबंधित क्षेत्र की निगरानी के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था है?
कार्रवाई से पहले रेत हटाई गई तो जिम्मेदारी किसकी?
मामले में सबसे अहम चिंता कथित रूप से भंडारित रेत की निगरानी को लेकर है। यदि मौके पर वास्तव में बड़ी मात्रा में रेत मौजूद है और कार्रवाई चार-पांच दिन बाद प्रस्तावित है, तो इस अवधि में रेत के परिवहन या स्थान परिवर्तन को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है, यह स्पष्ट नहीं है।
यदि जांच या कार्रवाई से पहले ही भंडारित रेत वहां से हटा दी जाती है तो बाद में उसके स्रोत और वास्तविक मात्रा का सत्यापन भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
रूमगा, सिलपहरी और कोलबीरा से मौहरीटोला तक कड़ी जोड़ने की मांग
मौहरीटोला में कथित रेत भंडारण के साथ रूमगा, सिलपहरी और कोलबीरा क्षेत्रों से कथित अवैध उत्खनन की शिकायतों को भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में पूरे मामले की जांच केवल डंपिंग स्थल तक सीमित रखने के बजाय रेत के स्रोत, परिवहन, भंडारण और आगे की बिक्री की प्रक्रिया तक किए जाने की मांग उठ रही है।
यदि विभागीय जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
एनजीटी के निर्देशों के बीच निगरानी पर सवाल
रेत उत्खनन और भंडारण को लेकर पर्यावरणीय नियमों तथा एनजीटी के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में मौहरीटोला में कथित बड़े पैमाने पर रेत भंडारण की शिकायत के बाद विभाग की निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, मौके पर वास्तव में कितनी रेत भंडारित है और उसका स्रोत क्या है, यह आधिकारिक जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
विभागीय कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल माइनिंग डायरेक्टर के अनुसार खनिज निरीक्षक के लौटने के बाद कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि विभाग मौके का निरीक्षण कर कथित रेत भंडारण की वास्तविक स्थिति, मात्रा और स्रोत की जांच करता है या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अवैध भंडारण की सूचना विभाग तक पहुंच चुकी है, तो निरीक्षक के लौटने तक निगरानी की क्या व्यवस्था है और क्या इस दौरान कथित भंडारित रेत को हटने से रोकने के लिए कोई कदम उठाया गया है?




