अमरेली में हरित क्रांति की पहल: नेपियर घास से बनेगी बायो-CNG

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किसान पुत्र जतिन गजेरा ने शुरू किया अभिनव प्रोजेक्ट, कृषि अवशेषों से रोजाना 10 टन से अधिक बायो-CNG उत्पादन का लक्ष्य

अमरेली। गुजरात के अमरेली जिले के शेडुभार गांव में कृषि और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई पहल आकार ले रही है। गांव के मूल निवासी और किसान परिवार से आने वाले जतिन मनसुखभाई गजेरा ने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘गोपीनाथ बायो CNG LLP’ प्लांट का निर्माण शुरू किया है।

प्रेस नोट के अनुसार, करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट नेपियर घास के साथ-साथ विभिन्न कृषि अवशेषों से बायो-CNG तैयार करेगा।

नेपियर घास और कृषि अवशेष बनेंगे ईंधन का आधार

प्लांट में नेपियर घास के अलावा गेहूं और चने की पराली, कपास तथा अरंडी के डंठल जैसे कृषि अवशेषों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किए जाने की योजना है।

परियोजना के तहत प्रतिदिन 10 टन से अधिक बायो-CNG तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रेस नोट के मुताबिक उत्पादित गैस की बिक्री सरकार को किए जाने की योजना है।

किसानों को खेत पर ही मिलेगा भुगतान

इस परियोजना की खास बात यह बताई गई है कि किसानों को नेपियर घास काटकर प्लांट तक पहुंचाने की जरूरत नहीं होगी। कंपनी की मशीनरी और टीम खेतों तक पहुंचकर घास की कटाई और पैकिंग करेगी।

इसके बाद किसानों को उनकी उपज की निर्धारित राशि खेत पर ही भुगतान किए जाने की योजना है। आसपास के क्षेत्र में करीब 1000 बीघा जमीन पर नेपियर घास की बुवाई शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।

किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

महंगे कृषि इनपुट और मौसम की अनिश्चितता के बीच इस परियोजना को किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बनाने की कोशिश की जा रही है। परियोजना से जुड़े लोगों का कहना है कि नेपियर घास के उत्पादन से किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ आय का एक और विकल्प मिल सकता है।

बायो-CNG के बाद अवशेष से बनेगी जैविक खाद

परियोजना को सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा से भी जोड़ा गया है। बायो-CNG उत्पादन की प्रक्रिया के बाद बचने वाले अवशेष का इस्तेमाल जैविक खाद के रूप में कृषि कार्यों में करने की योजना है।

प्रेस नोट के अनुसार, प्लांट के आगामी आठ महीनों में शुरू होने की संभावना है। परियोजना में केंद्र सरकार की गोबरधन योजना का लाभ लेने की भी योजना बताई गई है।

अमरेली में पांच और प्लांट लगाने की योजना

शेडुभार की परियोजना सफल रहने पर भविष्य में पूरे अमरेली जिले में पांच और बायो-CNG प्लांट स्थापित करने की योजना बताई गई है।

परियोजना के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त आय, स्थानीय युवाओं को रोजगार और कृषि अवशेषों के उपयोग से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।

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